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जीएसटी -कर्ज में फंसे व्यापारी उठा रहे हैं आत्महत्या जैसे कदम

gstनई दिल्ली। आम बजट को लेकर उल्टी गिनती शुरू हो गई है। 1 फरवरी (शनिवार) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। इस बीच दिल्ली के व्यापारियों ने बजट को लेकर अपनी मांगे सामने रखी है। इनमें सबसे ज्यादा डिमांड इनकम टैक्स व जीएसटी ऑडिट से छूट की सीमा बढ़ाने को लेकर है। कई संगठनों ने जीएसटी के सरलीकरण और टैक्स दरों में नरमी कायम रखने की मांग भी की है। इस बीच केद्र सरकार की तरफ से कपड़ा उद्यमियों एवं व्यापारियों को आश्वासन दिया गया है कि नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (जीएसटी) की दरों में फर्क और बदलाव की निरंतर प्रक्रिया के चलते देश भर के कपड़ा व्यापारी उद्यमी बेहद परेशान नजर आ रहे हैं।जिसको लेकर कपड़ा उद्यमियों एवं व्यापारियों की तरफ से केद्र सरकार से लगातार गुंजारिश की जा रही है कि कपड़ा उद्यमियों एवं व्यापारियों को जीएसटी की जटिल प्रक्रिया से अविलम्ब निजात दिलाई जाए।जिसको लेकर कपड़ा उद्यमियों एवं व्यापारियों की तरफ से केद्र सरकार से जीएसटी की दरों में असमानता और रिफंड में सहूलियत देने की गुजारिश की है और कहा कि इससे ही सही मायने में कपड़े का कारोबार सुचारु पूर्वक चलायमान हो सकेगा।जिसको लेकर जीएसटी काउंसिल की तरफ से कपड़ा उद्यमियों एवं व्यापारियों को आश्वस्त किया गया है कि कपड़ा उद्योग-व्यापार से संबंधित सभी समस्याओं का हर हाल में समाधान किया जाएगा।

दरअसल देश के शहरों में हाल ही आर्थिक तंगी और बाजार में मंदी के चलते कई छोटे और मझोले व्यापारियों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। इसमें सबसे खतरानाक मामला जुलाई 2019 का है।मध्यप्रदेश के इंदौर में कर सलाहकार और अनाज व्यापारी गोविंद अग्रवाल ने अपने निवास स्थान कृष्णा अपार्टमेंट की तीसरी मंजिल से कूद आत्महत्या कर ली थी। परिजनों का आरोप है कि जबरन जीएसटी में फंसाने के बाद दो सीए उनसे मोटी रकम की मांग कर रहे थे।मृतक गोविंद के बेटे उमेश के अनुसार घर और फर्म पर जीएसटी की रेड पढ़ी थी। इसके बाद से गोविंद परेशान रहने लगे थे।भाई संतोष अग्रवाल ने आरोप लगाया कि इंदौर के दो सीए ने गोविंद को फंसाने के लिए जीएसटी टीम को गलत जानकारी दी थी।इन लोगों ने आठ दिन पहले उनसे रुपये की मांग की थी।नहीं देने पर फंसाने की धमकी दी थी। इसके बाद से ही जीएसटी वाले उन्हें परेशान कर रहे थे।

जानते हैं व्यापारियों ने क्या कहा-

इंडस्ट्री की ग्रोथ पर ध्यान दें सरकार
भागरीथ मार्केट (चांदनी चौक) के प्रधान भरत आहूजा बताते हैं कि इन दिनों इंडस्ट्री की हालत काफी खराब है। इंडस्ट्री पर ही हमारा व्यापार आधारित है। रियल एस्टेट से लेकर आॅटो मोबाइल सेक्टर तक को बढ़ावा देने के लिए सरकार को ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा जीएसटी सरल होना चाहिए, पूरे देश में सिंगल टैक्स सिस्टम हो।

इनकम टैक्स में कटौती की मांग
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट, संजीव मेहरा ने इनकम टैक्स में छूट करने की मांग की है। उन्होंने इनकम टैक्स के वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे के लिए ऐम्नेस्टी स्कीम की मांग की है। उन्होंने कहा कि 2016 की डेक्लरेशन स्कीम एकतरफा थी और अब सरकार को इस दिशा में और बड़ी छूट की पहल करनी चाहिए। हालिया लिगेसी डिसप्यूट ऐम्नेस्टी में सिर्फ एक्साइज और सर्विस टैक्स विवादों के डिस्पोजल से वैट विवादों का बोझ अब भी नहीं घटा है। चूंकि वैट जीएसटी में समाहित हुआ है, ऐसे में केंद्र की जिम्मेदारी है कि वह सभी राज्यों को वैट ऐम्नेस्टी के लिए बाध्य करे।

इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाया जाए
डिप्टी गंज मार्केट के सेक्रेटरी भारत शर्मा इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की मांग की है ताकि छोटे उद्योग को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा उन्होंने इनकम टैक्स की दरें बढ़ाने की मांग की है। वे कहते हैं कि भारतीय इकोनाॅमी को बुस्ट करने के लिए सरकार को उपाय करना चाहिए। इसके लिए इंडस्ट्री के लिए पैकेज की घोषणा की उम्मीद है।

जीएसटी का हो सरलीकरण
द बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के सदस्य योगेश कुमार चैनी, बताते हैं कि इन दिनों कारोबार पूरी तरह मंदी के चपेट में है इससे उबरने के लिए सरकार जो कुछ कर सकती है उन्हें करना चाहिए। इसके साथ ही व्यापारी संगठन बोझिल जीएसटी से छुटकारा पाना चाहते हैं।
जीएसटी और आर्थिक वजहों से आत्महत्या की कुछ घटनाएं

जुलाई 2019— मध्यप्रदेश के इंदौर में कर सलाहकार और अनाज व्यापारी गोविंद अग्रवाल ने अपने निवास स्थान कृष्णा अपार्टमेंट की तीसरी मंजिल से कूद आत्महत्या कर ली थी। परिजनों का आरोप है कि जबरन जीएसटी में फंसाने के बाद दो सीए उनसे मोटी रकम की मांग कर रहे थे।
7 जनवरी 2018—उत्तराखंड बीजेपी के राज्य मुख्यालय में एक व्यापारी ने जनता दरबार के बीच आत्महत्या करने का प्रयास किया। बताया गया कि हल्द्वानी के रहने वाले व्यापारी प्रकाश पाण्डेय जीएसटी और नोटबंदी के कारण उनके व्यापार में हुए नुकसान के कारण परेशान थे।

12 फ़रवरी 2018— छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव में एक व्यापारी ने नोटबंदी और जीएसटी से परेशान होकर खुदकुशी कर ली। ब्रोकर महावीर चौरडिया ने ट्रेन के सामने आकर जान दे दी। आत्महत्या से पहले व्हॉटसअप में अपना सुसाइड नोट और कथित तौर पर एक ऑडियो भेजा। जिसमें शहर के कुछ कारोबारियों पर लेन-देन के मामले में दबाव बनाने के ज़िक्र के साथ नोटबंदी और जीएसटी को भी आत्महत्या की वजह बताया।

26 जुलाई2017— पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के एक गांव में रोजमर्रा का सामान बेचने वाले एक थोक विक्रेता ने आत्महत्या कर ली और इसके लिए जीएसटी को जिम्मेदार ठहराया।पुलिस ने यह जानकारी दी।पुलिस ने बताया कि नारायणपुर गांव के पिनाकी दत्ता का शव रात उसके कमरे से बरामद किया गया। व्यापारी ने जहर खा लिया था।जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला है जिसमें लिखा है मेरी मौत के लिए जीएसटी जिम्मेदार है और कोई नहीं।

14 जुलाई 2018 झारखंड की राजधानी रांची से 90 किलोमीटर दूर हजारीबाग में 14 जुलाई की देर रात को एक वैश्य परिवार के छह सदस्यों की मौत से पूरा क्षेत्र सन्न रह गया। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह कर्ज में डूबे होने की वजह से खुदकुशी का मामला है।नरेश माहेश्वरी ने पहले अपनी पत्नी और बच्चों की हत्या की और अंत में टेरेस से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को अपार्टमेंट के कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ।ब्राउन रंग के लिफाफे पर लाल स्याही से लिखा हुआ है कि अमन को लटका नहीं सकते थे, इसलिए उसकी हत्या की। इसके नीचे नीली स्याही से मोटे अक्षरों में सुसाइड नोट लिखा हुआ है और उसके नीचे लिखा है बीमारी + दुकान बंद + दुकानदारों का बकाया न देना + बदनामी + कर्ज = तनाव (टेंशन) = मौत।

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