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राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को मंजूरी

npr केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी जिसका मकसद देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना है. इस डेटा में जनसांख्यिकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी शामिल होगी.

क्या है पूरी प्रक्रिया

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में हर नागरिक की जानकारी रखी जाएगी. ये  नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. पॉपुलेशन रजिस्टर में तीन प्रक्रियाएं होगी. पहले चरण यानी अगले साल एक अप्रैल 2020 लेकर से 30 सितंबर के बीच केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे. वहीं दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 के बीच पूरा होगा. तीसरे चरण में संशोधन की प्रक्रिया 1 मार्च से 5 मार्च के बीच होगी.

क्या है एनपीआर

NPR देश के सभी सामान्य निवासियों का दस्तावेज है और नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. कोई भी निवासी जो 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है तो उसे NPR में अनिवार्य रूप से पंजीकरण करना होता है. 2010 से सरकार ने देश के नागरिकों की पहचान का डेटाबेस जमा करने के लिए इसकी शुरुआत की. इसे 2016 में सरकार ने जारी किया था.

NPR और NRC में अंतर

एनआरसी के पीछे जहां देश में अवैध नागरिकों की पहचान का मकसद छुपा है, वहीं इसमें छह महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी को NPR में आवश्यक रूप से पंजीकरण करना होता है.बाहरी व्यक्ति भी अगर देश के किसी हिस्से में छह महीने से रह रहा है तो उसे भी एनपीआर में दर्ज होना है. एनपीआर के जरिए लोगों का बायोमेट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं की पहुंच असली लाभार्थियों तक पहुंचाने का भी मकसद है.

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग 

npr2नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर को लेकर सरकार ने साफ कर दिया है कि इसका इस्तेमाल एनआरसी यानी रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स के लिए नहीं किया जाएगा। कैबिनट की बैठक खत्म होने के बाद मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि एनपीआर का इस्तेमाल एनआरसी के लिए किया जाएगा। मैं पूरी तरह से इससे इनकार करता हूं।नरेंद्र मोदी सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में फैसला लिया है कि 2021 की जनगणना के साथ नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर को भी अपडेट किया जाएगा। केंद्र सरकार ने एनपीआर के लिए 3500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है जो अगले साल अप्रैल, 2020 से सितंबर, 2020 के बीच किया जाएगा।सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में फैसले की जानकारी देते हुए कहा है कि एनपीआर का नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स यानी एनआरसी से कोई संबंध नहीं है। देश के दस राज्यों के मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि वो एनपीआर को लागू नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें लगता है कि ये एनआरसी की दिशा में एक कदम है।

क्या है NPR?
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर या राष्ट्रीय आबादी रजिस्टर एक ऐसा सरकारी दस्तावेज है जिसमें दर्ज निवासियों की लिस्ट से ये पता चलता है कि ये आदमी एक खास एरिया में कम से कम पिछले छह महीने से रह रहा है या कम से कम अगले छह महीने और रहने की मंशा रखता है। इसमें भारत के निवासियों की गांव से तहसील, तहसील से जिला और जिला से राज्य और राज्य से देश स्तर तक की लिस्ट होती है।

क्या दस्तावेज देना होगा?
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में नाम दर्ज करवाने के लिए जनगणना अधिकारियों के सवालों के जवाब देने होंगे. इसमें किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं है. लोग जो जवाब देंगे उसे ही अधिकारी दर्ज करेंगे और उसी के अधार पर रजिस्टर में सूचना दर्ज करेंगे. जनगणना अधिकारी आपका नाम, आपके माता-पिता का नाम, पत्नी, बच्चा समेत आपके परिवार के सदस्यों के नाम, जन्मदिन, राष्ट्रीयता, वर्तमान पता, स्थायी पता, रोजगार और शैक्षणिक योग्यता वगैरह पूछकर एक फॉर्म में दर्ज करेंगे लेकिन किसी भी जवाब के लिए प्रूफ में कोई दस्तावेज नहीं मांगेंगे

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