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किसान आंदोलन के नाम पर…..भारत के खिलाफ नई साजिश ?

khalisthanनई दिल्ली केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन का फिलहाल कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है। दिल्ली की सीमाओं पर किसान पिछले तीन महीने से अधिक समय से डटे हुए हैं। सरकार और किसानों में फिलहाल किसी भी तरह की बातचीत के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा की घोषणा के बाद पूरा सरकार व अन्य राजनीतिक दलों का पूरा फोकस उस तरफ शिफ्ट हो गया है। इसके उलट किसान आंदोलन का नया रूप देखने को मिल रहा है।किसान आंदोलन के बदलते स्वरूप का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें देश विरोधी खालिस्तान संगठन अपना फायदा खोज रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से इस बात की सूचना दी गई है कि खालिस्तान समर्थन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने यूएन को 7 लाख रुपये का डोनेशन दिया है। एसएफजे किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार की जांच कराने के लिए कमिशन ऑफ इन्क्वायरी के पक्ष में लॉबिंग कर रहा है।

भारत की आबो-हवा में जहर घोलने के लिए कुख्यात बैन खालिस्तान समर्थक संगठन- सिख फॉर जस्टिस ने संयुक्त राष्ट्र को चंदा दिया है। खालिस्तान समर्थक संगठन एसएफजे यानी सिख फॉर जस्टिस ने संयुक्त राष्ट्र को करीब 7 लाख रुपए का चंदा दिया है। इस बात की पुष्टि खुद जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त मानवाधिकार कार्यालय (यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर फॉर ह्यूमन राइट्स) के एक प्रवक्ता ने की है। सिख फॉर जस्टिस संगठन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारी किसानों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की जांच के लिए एक कमिशन ऑफ इंक्वायरी गठित करने की लॉबिंग कर रहा है। माना जा रहा है कि इसी मांग के लिए इस संगठन ने इतनी बड़ी रकम का चंदा दिया है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त मानवाधिकार (OHCHR) के कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि हमें 1 मार्च को सिख फॉर जस्टिस ग्रुप का प्रतिनिधित्व करने वाले एक व्यक्ति से ऑनलाइन के जरिए 10,000 डॉलर (करीब 7लाख) का चंदा प्राप्त हुआ है। उनके मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र तब तक किसी का चंदा लेने से इनकार नहीं करता, जब तक कि वह शख्स या संगठन संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल न हो या फिर संयुक्त राष्ट्र चार्टर या इसके सिद्धांतों के विपरीत गतिविधियों में शामिल न हो।

अमेरिका में रहने वाला गुरपतवंद सिंह पन्नून, जो कि खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस का जनरल काउंसेल है, वही इसके पीछे बताया जा रहा है। भारत की ओर से आतंकी घोषित हुए गुरपतवंद सिंह पन्नून ने ही भारत में प्रद्रशनकारी किसानों के खिलाफ कथित हिंसा और राजद्रोह केसों की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र से कमीशन ऑफ इंक्यावरी गठित करने की मांग की है और उसका दावा है कि इसके लिए सिख समुदाय ने 13 लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब 9,44,96,02 रुपए दान देने की बात कही है। हालांकि, अब तक संयुक्त राष्ट्र ने कमीशन की स्थापना नहीं की है। गुरपतवंत सिंह ने कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र ने आयोग की स्थापना नहीं की है। लेकिन हम मानवाधिकारों के लिए उच्चायुक्त के संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के माध्यम से इस मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। बता दें कि कमीशन ऑफ इंक्वायरी का गठन आमतौर पर उन जगहों के लिए होता है, जहां पर मानवाधिकारों के हनन का मामला सामने आता है। फिलहाल, सीरिया के लिए एक एक कमीशन ऑफ इंक्वायरी गठित है।यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर फॉर ह्यूमन राइट्स के प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से भारत में ऐसी किसी कमीशन को गठित करने की योजना नहीं है। उन्होंने कहा, ज्यादातर कमीशन ऑफ इंक्वायरी का गठन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 47 सदस्यों की विशेष मत के बाद होता है। साथ ही इसके लिए सुयुक्त राष्ट्र की ओर से बजट भी तय होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी खास गतिविधि के लिए संयुक्त राष्ट्र किसी व्यक्ति या संठन के दान देने मात्र से तैयार नहीं हो जाता।
आंदोलनकारी या भाजपा के खिलाफ स्टार कैंपेनर?
किसान आंदोलन के नाम पर चुनावी राज्यों में जम कर राजनीति देखने को मिल रही है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत नंदीग्राम में नए रूप में नजर आए। ऐसा लग रहा था कि राकेश टिकैत आंदोलनकारी किसान नहीं बल्कि भाजपा के खिलाफ स्टार कैंपेनर बनकर पहुंचे हैं। इस बात का अंदाजा इस से सहज ही लगाया जा सकता है कि टिकैत जब पश्चिम बंगाल पहुंचे तो तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन ने एयरपोर्ट पर टिकैत की अगवानी की। टिकैत ने शहर में और पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के साथ किसानों को संबोधित किया।कोलकाता और नंदीग्राम में किसान पंचायत का आयोजन भले ही संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हुआ लेकिन यह भाजपा के खिलाफ चुनावी सभा ज्यादा लग रही थी। टिकैत ने इस सभा में कहा कि भाजपा को वोट मत देना। टिकैत ने भाजपा को ‘धोखेबाजों की पार्टी’ कहते हुए कहा कि हम भाजपा का विरोध करने वालों और किसानों तथा गरीबों के साथ खड़े होने वालों के पाले में रहेंगे। टिकैत ने कहा कि अगर भाजपा को वोट दिया गया तो वे आपकी जमीन बड़े कॉर्पोरेट्स और उद्योगों को दे देंगे और आपको भूमिहीन बना देंगे।

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