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यूपी की कंपनी ने 10 दिनों में बनाए 3000 वेंटिलेटर

lko_1_5971944_835x547-mप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी अभियान को आगे बढ़ाते हुए नोएडा की कंपनी एग्वा हेल्थकेयर ने कोरोना से जंग के लिए वेंटिलेटर के लिए विदेशों पर निर्भरता बहुत हद तक कम कर दी है। प्रदेश सरकार की कोशिशों से वेंटिलेटर का उत्पादन बढ़ाने के लिए मारूति सुजुकी ने इस कंपनी से हाथ मिलाया।
नतीजा यह निकला कि कंपनी ने हर महीने 10 हजार वेंटिलेटर बनाने की क्षमता विकसित की गई है। पिछले दस दिनों में इस मझोले आकार की कंपनी ने 3000 वेंटिलेटर बनाकर अपनी क्षमता को सिद्ध किया है। प्रदेश सरकार वेंटिलेटर निर्माण की इस प्रगति को बड़ी उपलब्धि मान रही है। महज दो-तीन महीने में ही यह कंपनी देश में वेंटिलेटर की कमी को पूरा करने में सक्षम होगी। नोएडा की यह कंपनी अभी तक साल में महज तीन सौ वेंटिलेटर बनाती थी।

केंद्र सरकार ने दिए 50 हजार वेंटिलेटर के आर्डर

प्रदेश के एमएसएमई व निर्यात प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव डा. नवनीत सहगल के मुताबिक नोएडा की कंपनी एग्वा हेल्थकेयर देश में वेंटिलेटर बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने जा रही है। एग्वा द्वारा बनाए जा रहे वेंटिलेटर के रेट विदेशों से आयात होने वाले वेंटिलेटर से कम है। भारत सरकार ने इस कंपनी को 50 हजार वेंटिलेटर निर्माण का आर्डर दिया है। इस कंपनी ने यूपी सरकार को कंपनी को 240 वेंटिलेटर दे दिए हैं। और 160 वेंटिलेटर अगले दो दिन में यूपी सरकार को मिल जाएंगे।

वेंटिलेटर निर्माण में अन्य कंपनियां कर रहीं सहयोग

मारुति सुजूकी के साथ एक जॉइंट वेंचर के तहत वेंटिलेटर निर्माण की तकनीक एग्वा हेल्थकेयर की है। मारुति द्वारा इकाई को मैनपावर तथा अन्य सहुलियतें दी जा रही हैं। वायरिंग एवं कनेक्टर, पीसीबी आदि पार्ट्स के लिए बीएचईएल, एसकेएच मशीन, मदर्सन सूमी से सहयोग मिल रहा है। कोरोना के इलाज के लिए चिकित्सीय उपकरण खासकर वेंटिलेटर बनाने के लिए देश की कई बड़ी कंपनियों ने हाथ बढ़ाया है। देश के विभिन्न राज्यों में महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारूति सुजुकी, टाटा मोर्ट्स, बीएचईएल, रिलायंस जैसी कंपनियां चिकित्सीय उपकरण बनाने में उतरी हैं।

देश के कुल उत्पादन का 25 फीसदी पीपीई किट बन रहा यूपी में 
प्रमुख सचिव नवनीत सहगल के मुताबिक प्रदेश में इस समय कोरोना से बचाव के लिए बड़ी तादाद में मास्क और पीपीई किट का निर्माण भी चल रहा है। देश में प्रतिदिन इस समय दो लाख पीपीई किट बनाए जा रहे हैं। इसमें राज्य की एमएसएमई की 26 इकाइयां भी लगी हैं। ये इकाईयां प्रतिदिन करीब 50 हजार पीपीई किट बना रही हैं।

चीन से आयात पर निर्भरता पर कम करने के लिए उत्तर प्रदेश अपनी विशेष मुहिम में जुट गया 

कोरोना संक्रमण के खिलाफ जंग के साथ अब आत्मनिर्भर बनने का अभियान तेज हो गया है। चीन से आयात पर निर्भरता पर कम करने के लिए उत्तर प्रदेश अपनी विशेष मुहिम में जुट गया है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसका संकेत दिया है।  अब चीन में बने लक्ष्मी गणेश,चाइनीज दिए,झालर व अगरबत्ती  का स्थान स्वदेशी सामान लेंगे। बात यहां तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रानिक्स गुड्स, इलेक्ट्रिकल सामान, रसायन, हैंडलूम, आदि सामान का उत्पादन इतना बढ़ाया  जाएगा ताकि देश को इन सामानों को चीन से मंगाने की जरूरत न पड़े। भारत दुनिया सामान व सेवाओं के रूप में 514.07 बिलियन अमेरिकी डालर खर्च करता है। इसमें 13.67  प्रतिशत हिस्सेदारी चीन से आए सामान की है। देश मुख्यत: इलेक्ट्रानिक्स गुड्स, न्यूक्लियर रिएक्टर, आर्गेनिक कैमिकल, प्लास्टिक, फर्टीलाइजर, संचार उपकरण, कम्प्यूटर हार्डवेयर जैसे 50 तरह की वस्तुएं आयात करता है। इनमें करीब एक दर्जन सामान तो यूपी में बनते हैं। अब इनसे संबंधित ज्यादा से ज्यादा यूनिट खोलने के लिए सरकार व्यापक तैयारी कर रही है। इसके लिए नीतियों में तब्दीली के साथ ईज आफ डूंइंग बिजेनस पर जोर है तो कई रियायतें भी बढ़ाई जा रही हैं। उत्तर प्रदेश मोबाइल कंपनियों का बड़ा हब है।दक्षिण कोरिया व चीन की  कई कंपनियां यहां पर मोबाइल निर्माण कर रही हैं। लेकिन मोबाइल सेट के कई पुर्जें अभी भी चीन व अन्य देशों से मंगाए जाते हैं। उत्तर प्रदेश में  इलेक्ट्रिनक्स, गुडस कैमिकल प्रोडेक्ट चर्म उत्पाद, दवा निर्माण, एपीआई उत्पादन, धातु, कांच व टेक्सटाइल,सिल्क, काटन, साबुन, पालिस, क्रीम, फैब्रिक,  लकड़ी का सामान आदि का निर्माण पहले से हो रहा है। अब इसके उत्पादन को बढ़ाया जाएगा। ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके। वैसे हाल के वर्षों में यूपी का निर्यात भी काफी बढ़ा है।

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