Pages Navigation Menu

Breaking News

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा

कोविड-19 वैक्सीन की एक खुराक मौत को रोकने में 96.6 फीसदी तक कारगर

हरियाणा: 10 साल पुराने डीजल, पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध नहीं

सच बात—देश की बात

जनता दल संसदीय बोर्ड के अध्‍यक्ष बनाए गए उपेंद्र कुशवाहा

upander khuswhaपटना राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का जनता दल युनाइटेड  में विलय हो गया है। इसके साथ ही सीएम नीतीश कुमार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को जेडीयू राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा की है। पटना स्थित जेडीयू के प्रदेश मुख्यालय में रविवार को आयोजित एक समारोह के दौरान RLSP का जेडीयू में विलय पर खुशी जाहिर करते हुए नीतीश कुमार ने कुशवाहा को तत्काल प्रभाव से जेडीयू के राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा की। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने कुशवाहा को गुलदस्ता भेंट करके उनका जेडीयू में स्वागत किया। सीएम नीतीश के इस फैसले के साथ ही उपेंद्र कुशवाहा के राज्यसभा भेजे जानें की अटकलें भी तेज हो गई हैं।पार्टी मुख्यालय में आयोजित मिलन समारोह में जदयू के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी में रालोसपा सु्प्रीमो उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी के जदयू में विलय की घोषणा करेंगे। इसके साथ ही एक बार फिर बिहार की राजनीति में लव-कुश जोड़ी देखने को मिलेगी।  

विलय के बाद नीतीश ने कुशवाहा को दिया बड़ा गिफ्ट
jdu rlspRLSP के JDU में विलय के बाद सीएम नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा को बड़ा राजनीतिक तोहफा दिया है। नीतीश ने कहा कि भले ही उपेेद्र कुशवाहा ये कहें कि विलय के बाद उनकी कोई ख्वाहिश नहीं है। लेकिन JDU उनकी प्रतिष्ठा का ध्यान रखेगा। इसी के बाद नीतीश ने सीधे ऐलान कर दिया कि तत्काल प्रभाव से उपेंद्र कुशवाहा JDU के राष्ट्रीय संसदीय दल के अध्यक्ष होंगे।विलय के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि ‘उपेंद्र कुशवाहा अपने सभी साथियों के साथ जनता दल यूनाइटेड के कार्यालय में पहुंचे हैं, उन सभी का स्वागत करता हूं। हम सब पहले भी एक थे और आज फिर से एक हैं।’नीतीश कुमार ने कहा कि रालोसपा का जनता दल यूनाइटेड में विलय को लेकर पिछले कई दिनों से बातचीत चल रही थी। नीतीश कुमार ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा की RLSP के JDU में विलय की बात चलते ही पार्टी के सभी नेता काफी खुश हुए थे। नीतीश ने कहा कि हम मिलकर बिहार के विकास के लिए काम करेंगे।

आगे का राजनीतिक जीवन नीतीश कुमार और जेडीयू  को समर्पित 

जेडीयू में शामिल होने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि ‘मीडिया के लोग पूछ रहे थे कि वो जेडीयू में में शामिल हो रहे हैं इसके लिए क्या कुछ तय हुआ है? मैंने अपने राजनीतिक जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं और जेडीयू तो मेरी अपनी पार्टी है। जो लोग अपने घर में बातचीत करते हैं वो कोई डिमांड नहीं करते हैं।’उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के जितने भी कार्यकर्ता आज JDU में शामिल हुए हैं वो संकल्प ले की जनता दल यूनाइटेड को नंबर वन पार्टी बनाने का काम करेंगे। उपेंद्र कुशवाहा ने यह भी कहा कि उनके आगे का राजनीतिक जीवन जितने भी साल के लिए होगा वो नीतीश कुमार के लिए और जनता दल यूनाइटेड के लिए समर्पित होगा।

शरद यादव को जेडीयू से बर्खास्त , राज्यसभा जा सकते हैं कुशवाहा

वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव को जेडीयू से बर्खास्त कर दिया गया है। जेडीयू का कहना है कि इस बर्खास्तगी के साथ ही शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो जाती है, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। शरद यादव ने राज्यसभा की सीट से अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इसपर जल्द ही फैसला आने वाला है। माना जा रहा है कि राज्यसभा की इसी सीट पर उपेंद्र कुशवाहा को बिठाया जा सकता है।नीतीश कुमार राज्य की राजनीति में हैं। ऐसे में पार्टी की ओर से केंद्र की राजनीति में किसी चर्चित चेहरे की कमी है। हरिवंश के राज्यसभा के उपसभापति बनने के बाद से संसद में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने वाले चहरे की दरकार काफी समय से महशूस की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि उपेंद्र कुशवाहा इस कमी को पूरा कर सकते हैं।

BJP के सामने कमजोर नहीं दिखना चाहते हैं नीतीश
सूत्रों का कहना है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के तीसरे नंबर की पार्टी बनने से नीतीश कुमार चिंतित हैं। फिलहाल बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से नीतीश कुमार अपनी पार्टी के नेताओं के साथ मजबूती से सरकार में भागीदार हैं। लेकिन बीजेपी का राज्य नेतृत्व तीसरे नंबर की पार्टी को इतनी तवज्जो देने से खुश नहीं है। भविष्य में बीजेपी क्या कदम उठाएगी उसी को ध्यान में रखकर नीतीश कुमार चुनाव बाद से लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।इसी वजह से चुनाव बाद नीतीश कुमार ने उमेश कुशवाहा को प्रदेश अध्यक्ष और आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया है। इस फैसले के जरिए नीतीश कुमार ने कुर्मी+कोइरी वोटरों को एकजुट होने का संदेश देने की कोशिश की है। दोनों जातियों को मिलाकर बिहार में करीब 11 फीसदी से ज्यादा वोटर होते हैं जो पूरी तरह से निर्णायक होते हैं। इसी को ध्यान में रखकर नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी में लेने के साथ ही जेडीयू राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है।

कुर्मी और कुशवाहा जातियों के साथ एक शक्तिशाली राजनीतिक साझेदारी

पूर्व में नीतीश कुमार के दल समता पार्टी और बाद में जेडीयू में रहे उपेंद्र कुशवाहा को 2004 में पहली बार विधायक बनकर आने के बावजूद कुमार ने कई वरिष्ठ विधायकों की अनदेखी करके कुर्मी और कुशवाहा जातियों के साथ एक शक्तिशाली राजनीतिक साझेदारी को ध्यान में रखते हुए बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनाया था।2013 में जेडीयू के राज्यसभा सदस्य रहे कुशवाहा ने विद्रोही तेवर अपनाते हुए जेडीयू ने नाता तोड़कर RLSP नामक नई पार्टी का गठन कर लिया था। वह 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा नीत एनडीए का हिस्सा बन गये थे और उस चुनाव के बाद कुशवाहा को नरेंद्र मोदी सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री बनाया था।जुलाई 2017 में जेडीयू की एनडीए में वापसी ने समीकरणों को एक बार फिर बदल दिया और RLSP इस गठबंधन ने नाता तोड़कर राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन का हिस्सा बन गई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में कुशवाहा ने काराकाट और उजियारपुर लोकसभा सीटों से चुनाव लड़स था लेकिन वह हार गए थे।2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कुशवाहा ने महागठबंधन से नाता तोड़कर मायावती की बसपा और एआईएमआईएम के साथ नया गठबंधन बनाकर यह चुनाव लड़ा था। बिहार विधानसभा चुनाव में RLSP प्रमुख कुशवाहा को उनके गठबंधन द्वारा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया गया था लेकिन इनके गठबंधन में शामिल हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में जहां पांच सीट जीती थी, वहीं RLSP एक भी सीट नहीं जीत पायी थी।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी सीटों के बंटवारे में मनमुताबिक सीटें नहीं मिलने पर महागठबंधन से अलग होकर महागठबंधन और एनडीए से अलग अलाएंस के गठन की घोषणा की लेकिन चुनाव में उन्हें एक भी सीट नहीं मिली। इसके बाद उनकी पार्टी में भी विद्रोह का सामना करना पड़ा। एक-एक कर कई नेता उन्हें छोड़कर राजद, भाजपा और जदयू का दामन थामते चले गए। इसके बाद एक बार  फिर से उपेंद्र कुशवाहा और सीएम नीतीश की निकटता बढ़ती चली गई

Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »