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सच बात—देश की बात

बाइडन सरकार से नाराज अमेरिकी सैनिक

amricaवॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की घोषणा कर दी है। सैनिकों की वापसी का काम 31 अगस्त तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद से ही अफगानिस्तान में तालिबान ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। लगातार जारी हिंसक लड़ाई में अब तक तालिबान कई जिलों और प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर चुका है। अफगानिस्तान में 20 सालों तक चले युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले अमेरिकी सैनिक अपनी सरकार के इस फैसले से निराश और नाखुश हैं।

‘मेरे दोस्त ने किसके लिए जान गंवाई’
यूएस आर्मी वेटरन और शिकागो के मूल निवासी 40 साल के टॉम एमेंटा ने वॉशिंगटन पोस्ट से बात करते हुए कहा कि अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान में अंतिम कुछ दिन शेष बचे हैं। गुरुवार को जब खबर आई कि तालिबान ने कंधार और हेरात पर कब्जा कर लिया है तो उन्हें बहुत गुस्सा आया। एमेंटा ने अपने दोस्त जे ब्लेसिंग की मौत को याद किया जो 2003 में एक बम धमाके में मारे गए थे। उन्होंने कहा, ‘मेरे दोस्त ने क्यों अपनी जान गंवाई थी और किसके लिए?’

अमेरिकी सरकार के फैसले से नाराज
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के पास कभी कोई समाधान नहीं था लेकिन अब जब चीजें और ज्यादा मुश्किल हो गई हैं, हम वहां से जा रहे हैं? यह सही नहीं है। अमेंटा के गुस्से का कारण न केवल ब्लेसिंग और एनएफएल स्टार पैट्रिक टिलमैन जैसे दोस्तों की मौत है बल्कि अफगानिस्तान में उथल-पुथल जैसे हालात के बीच अपने सैनिकों को वापस बुलाने का अमेरिकी सरकार का फैसला भी है। अमेंटा ने कहा कि तालिबान लड़ाकों द्वारा नागरिकों और अफगान सैनिकों के खिलाफ कथित युद्ध अपराध करने की खबरों से वह डरे हुए हैं।

अफगानों के साथ अनकहा वादा तोड़ा
आर्मी वेटरन एरिज़ोना के 34 साल के जॉन व्हेलन ने कहा कि यह निराशाजनक है। उन्होंने कहा, ‘हमें पता था कि यह होगा। अफगानिस्तान में तैनात रह चुका हर सैनिक अब पूछा रहा है कि आखिर मेरे दोस्त ने किसके लिए जान गंवाई? मैं भी यही सवाल पूछता हूं।’ तालिबान के कंधार पर कब्जा करने की खबर ने व्हेलन को खासतौर पर प्रभावित किया है क्योंकि उनके दो दोस्तों की मौत 2010 में इसी शहर के पास हो गई थी। व्हेलन का मानना है कि अमेरिका की वापसी ने अफगान लोगों के साथ किए एक अनकहे वादे को तोड़ दिया है।

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