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ताइवान पहुंचे अमेरिकी मंत्री, भड़का चीन

America-vs-China-Warताइपे अमेरिका के स्वास्थ्य एवं मानव सेवा (एचएचएस) मंत्री एलेक्स अजार के नेतृत्व में रविवार को शीर्ष अमेरिकी दल ताइवान की यात्रा पर पहुंचा। अमेरिका और ताइवान के बीच 1979 में औपचारिक द्विपक्षीय संबंध समाप्त होने के बाद से किसी अमेरिकी कैबिनेट मंत्री की यह पहली यात्रा है। चीन पहले ही अजार की यात्रा के मद्देनजर अपना विरोध जता चुका है। साथ ही चीन ने इस यात्रा को ताइवान से किसी तरह का आधिकारिक संबंध नहीं रखने की अमेरिकी प्रतिबद्धता के प्रति विश्वासघात करार दिया।

  • 41 साल बाद ताइवान पहंचा कोई अमेरिकी मंत्री, चीन ने जताई सख्त नाराजगी
  • अमेरिकी मंत्री एलेक्स अजार के ताइवान पहुंचने से चीन के साथ तनाव बढ़ना तय
  • ताइवान और अमेरिका में घनिष्ठ द्विपक्षीय संबंध, चीन के दावे को भी अमेरिका ने नकारा

ताइवानी राष्ट्रपति से मिलेंगे अमेरिकी मंत्री
कोरोना वायरस से निपटने के लिए समन्वय स्थापित करने के मद्देनजर अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान अजार ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन और स्वास्थ्य अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। वायरस का केंद्र रहे चीन से बेहद करीब स्थित होने के बावजूद इस द्वीप में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले 500 से भी कम रहे और इस घातक वायरस से सात लोगों की मौत हुई। ऐसे में ताइवान सरकार की स्वास्थ्य प्रणाली को इसका श्रेय जाता है।

ताइवान के साथ आपसी संबंधों पर चर्चा करेगा अमेरिका
अजार के कार्यालय ने कहा कि वह कोविड-19, वैश्विक स्वास्थ्य और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति एवं प्रौद्योगिकी के संबंध में ताइवान की भूमिका को लेकर चर्चा करेंगे। वहीं चीन की सरकारी मीडिया ने भी ताइवान और अमेरिका के बढ़ते संबंधों को लेकर दोनों देशों को चेतावनी दी है। ग्लोबल टाइम्स डींगे हांकते हुए लिखा कि चीन ने अपने सैन्य शक्ति में इतना इजाफा कर लिया है कि ताइवान अमेरिका से कितना भी सैन्य उपकरण और हथियार खरीद ले इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

क्यों है चीन और ताइवान में तनातनी
1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने चियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। जिसके बाद चियांग काई शेक ने ताइवान द्वीप में जाकर अपनी सरकार का गठन किया। उस समय कम्यूनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया। तब से ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना मानता है।

ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन
चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी इसके लिए सेना के इस्तेमाल पर भी जोर देती आई है। ताइवान के पास अपनी खुद की सेना भी है। जिसे अमेरिका का समर्थन भी प्राप्त है। हालांकि ताइवान में जबसे डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी सत्ता में आई है तबसे चीन के साथ संबंध खराब हुए हैं।

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