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वीएस नायपॉलः आजीवन करते रहे लेखन

vs-naipaul-1002344त्रिनिदाद में जन्मे वीएस नायपॉल ने अध्ययन के दौरान ऑक्सफोर्ड में चार साल बिताने के बाद लिखना शुरू किया और फिर जीवन में कोई दूसरा व्यवसाय नहीं चुना. कहानी और इससे जुड़ी विधाओं में उन्होंने करीब 30 किताबें लिखीं और कई प्रतिष्ठि‍त पुरस्कारों से सम्मानित हुए.विद्याधर सूरज प्रसाद नायपॉल यानी वीएस  नायपॉल के पूर्वज ट्रिनिडाड गए थे और वहीं बस गए. उनकी शिक्षा-दीक्षा इंग्‍लैंड में हुई और वह अंतिम समय तक लंदन में ही रहे. साहित्‍य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्‍हें दुनियाभर में कई पुरस्‍करों से नवाजा गया. 2008 में द टाइम्‍स ने 50 महान ब्रिटिश लेखकों की सूची में नायपॉल को सातवां स्‍थान दिया था. खास बात यह थी कि इस सूची में 1945 से बाद की कृतियों को जगहों दी जानी थी.

नायपॉल की कुछ उल्‍लेखनीय कृतियों में इन ए फ्री स्‍टेट (1971), ए वे इन द वर्ल्‍ड (1994), हाफ ए लाइफ (2001), मैजिक सीड्स (2004) जैसी किताबें शामिल हैं. उक्त परिचय इसलिए जरूरी है क्योंकि आम तौर पर पढ़ने के शौकीन तबके का एक बड़ा हिस्सा बुक स्टॉल पर लेखक बारे में जानने के बाद ही किताब खरीदता है. हालांकि भारतीय मूल के नायपॉल किसी परिचय के मोहताज नहीं रहे, लेकिन यह परिचय और परिचय में यह लिखना कि लेखक ने लेखन के अलावा कोई और व्यवसाय नहीं चुना, जरूरी है.

 उनकी एक किताब ‘ए राइटर्स पीपुल’ है,  जो काफी दिलचस्प है. जैसा कि नाम से ही स्प्ष्ट है कि यह किताब उन लोगों के बारे में है, जिससे लेखक का संबंध रहा है, जिनसे उनके लेखन का संबंध रहा है या फिर यह कि वह जिन्होंने उन्हें लिखने के लिए प्रेरित किया. नायपॉल ने इस किताब में अपनी लेखन यात्रा को समेटने का काम किया है. यह एक कहानी है, उस 10 साल के बच्चे की जो लेखक बनना चाहता है, लिखना चाहता है. इसकी शुरुआत वह अपनी डायरी से करता है और फिर रमा रहता है इस सोच में इसमें क्या लिखे, क्या नहीं लिखे. यह किताब एक लेखक के रूप में नायपॉल की सोच है. वह कहते हैं, ‘मैं अपनी पूरी जिंदगी देखने के तरीकों के बारे में सोचता रहा हूं और यह कि ये दुनिया की रूपरेखा को किस तरह बदल देते हैं.’

भारतीय मूल के वी.एस. नायपॉल अपने बयानों के लिए भी ख़ासे प्रसिद्ध रहे. उन्होंने इस्लाम की ख़ूब आलोचना की. उनका मानना था कि इस्लाम ने लोगों को ग़ुलाम बनाया और दूसरों की संस्कृतियों को नष्ट करने की कोशिश की.नायपॉल का इस्लाम पर कहना था, “जिनका धर्मांतरण हुआ उन पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा. जिनका धर्म परिवर्तन होता है, उनका अपना अतीत नष्ट हो जाता है. आपको अपना इतिहास कुचलना होता है. आपको कहना होता है कि मेरे पूर्वजों की संस्कृति अस्तित्व में ही नहीं है और न ही कोई मायने रखती है.”उन्होंने कहा था, “मुस्लिमों द्वारा इस तरह से पहचान को मिटाना, उपनिवेशवाद से भी बदतर था. यह वास्तव में बहुत ही बदतर था.”उन्होंने तर्क देते हुए कहा था कि पाकिस्तान इसका जीता जागता उदाहरण है. उनका कहना था, “वास्तव में पाकिस्तान की कहानी एक आतंक की कहानी है. यह एक कवि से शुरू होती है जो यह सोचता था कि मुसलमान अत्यधिक विकसित हैं जिनको भारत में रहने के लिए एक ख़ास जगह होनी चाहिए.”

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