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वाराणसी में ABVP को झटका,संस्कृत यूनिवर्सिटी में सभी सीटें हारी

SanskritUniversity1वाराणसी में एबीवीपी को बड़ा झटका लगा है। एमएलसी की दोनों सीटें और काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव हारने के बाद  एबीवीपी संस्कृत यूनिवर्सिटी की भी सभी सीटें हार गई है। संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी की सभी सीटों पर कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने कब्जा जमाया है। छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की हार को भाजपा की हार माना जा रहा है। वाराणसी में भाजपा को लगातार यह तीसरा झटका लगा है। अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के कृष मोहन शुक्ला ने 442 वोट पाकर एबीवीपी के अजय दुबे (306) को 136 वोटों से हराया। उपाध्यक्ष पद पर  एनएसयूआई के अजीत कुमार चौबे ने 411 वोट हासिल कर एबीवीपी के चंद्रमौली तिवारी (343) को 68 वोटों से हराया। महामंत्री पद पर एनएसयूआई के शिवम चौबे ने 485 वोट हासिल कर एबीवीपी के गौरीशंकर गंगेले (266) को 219 वोटों से हराया। पुस्तकालय मंत्री पद पर एनएसयूआई के आशुतोष कुमार मिश्र ने 415 वोट हासिल कर एबीवीपी के विवेकानंद पांडेय (338) को 77 वोटों से हराया।

इससे पहले कड़ी सुरक्षा व गहमागहमी के बीच छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान सुबह नौ बजे से शुरू हुआ I दोपहर बारह बजे तक पचास फीसद मत पड़ चुके थे। छात्रसंघ के विभिन्न पदों के लिए 16 प्रत्याशी मैदान में थे। छात्रों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। विवि परिसर में परिचय पत्र व फीस रसीद  देखने के बाद ही छात्रों को मतदान स्थल तक जाने की छूट दी जा रही थी। निर्वाचन अधिकारी प्रो. सुधाकर मिश्र के मुताबिक मतदान शांतिपूर्वक संपन्‍न हुआ है। मतदान के बाद मतगणना दोपहर तीन बजे से शुरू हुई। प्रत्याशी लोटपोट कर  वोट मांगते रहे। मतदाओं का कोई पैर पकड़ कर लोट रहा है तो कोई हाथ जोड़ रहा है। मतदान के दौरान शक्ति प्रदर्शन का आलम यह है कि पंपलेट से सड़क पटी हुई थी । वहीं समर्थकों को नियंत्रित करने के लिए कई बार खदेड़ना पड़ा ।  छात्रों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। परिसर में परिचय पत्र व फीस रसीद देखने के बाद ही छात्रों को मतदान स्थल तक जाने की छूट दी जा रही थी।  चुनाव में छात्रसंघ अध्यक्ष समेत चार पदों के लिए आठ प्रत्याशी मैदान में हैं। वहीं सहित्य संस्कृति संकाय व दर्शन संकाय प्रतिनिधि पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए हैं। जबकि आधुनिक ज्ञान विज्ञान संकाय प्रतिनिधि के लिए एक भी छात्र ने नामांकन नहीं किया था। ऐसे में छात्रसंघ के चाराें प्रमुख पदों के अलावा श्रमण विद्या संकाय व वेद वेदांग संकाय प्रतिनिधि के लिए भी चुनाव हुआ। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री व पुस्तकालय मंत्री पद पर सीधा मुकाबला हुआ।

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