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महाराज विक्रमादित्य द्वारा श्रीराम मन्दिर का निर्माण

vikarmaditya ayodhya( मनोज वर्मा ) धर्म ग्रन्थों के आधार पर समाज की धारणा है कि जब श्रीराम जी प्रजा सहित दिव्यधाम को प्रस्थान कर गए तो सम्पूर्ण अयोध्या, वहाँ के भवन, मठ-मन्दिर सभी सरयू में समाहित हो गए| अयोध्या का भूभाग शेष रहा। अयोध्या बहुत दिनों तक उजड़ी रही।तत्पश्चात महाराज कुश जो कुशावती (कौशाम्बी) में राज्य करने लगे थे, पुनः अयोध्या आए और अयोध्या को बसाया, इसका उल्लेख कालिदास ने ‘रघुवंश’ ग्रन्थ में किया है। लोमश रामायण के अनुसार उन्होंने कसौटी पत्थरों के खम्भों से युक्त मन्दिर जन्मभूमि पर बनवाया। जैन ग्रन्थों के अनुसार दुबारा उजड़ी अयोध्या को पुनः ऋषभदेव ने बसाया। भविष्य पुराण में लिखा है कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने मोक्षदायिनी सप्त पुरियों को बसाया था। ईसा से 57 वर्ष पूर्व विक्रमादित्य उज्जैन के राज्य सिंहासन पर आरुढ़ हुए तभी से विक्रम संवत् प्रारम्भ हुआ। विक्रमादित्य के पूर्व अयोध्या एक बार पुनः उजड़ चुकी थी। ग्रन्थों में आए वर्णन के निर्दिष्टानुसार उन्होंने सरयू नदी के लक्ष्मण घाट को आधार बनाकर विभिन्न स्थलों को चिन्हित करके 360 मन्दिर बनाए। उनके द्वारा चिन्हांकित विशेष स्थलों में रामकोट-राम जन्मभूमि, नागेश्वरनाथ मन्दिर, मणिपर्वत आदि प्रमुख हैं। भगवान विष्णु के परमभक्त होने के कारण विष्णुपद नामक पर्वत पर विष्णुध्वज की स्थापना की तथा श्रीराम जन्मभूमि पर एक भव्य मन्दिर का निर्माण करवाया।
सालार मसूद का श्रीराम जन्मभूमि पर आक्रमण एवं राजा सुहेलदेव द्वारा उसका वध
आक्रमणकारी सालार मसूद ने 1033 ई0 में साकेत अथवा अयोध्या में डेरा डाला था तथा उसी समय जन्मभूमि के द्वारा प्रसिद्ध मन्दिर को भी ध्वस्त किया था ।
सालार मसूद जब मन्दिर को तोड़कर वापिस जा रहा था तभी बहराइच में घनघोर युद्ध में सालार मसूद का वध 14 जून, 1033 को वीर पराक्रमी राजा सुहेलदेव ने किया।
महाराजा सुहेलदेव के भीषण युद्ध से आक्रान्ता इतने भयभीत हो गए कि सैकडों वर्ष तक किसी की हिम्मत भारत आने की नहीं हुई।
गहड़वाल वंशीय राजाओं ने पुनः मन्दिर का निर्माण कराया।
बाबर का अयोध्या पर आक्रमण
सन् 1526 में बाबर अयोध्या की ओर आया। उसने अपना डेरा सरयू के उस पार डाला। वह भारत पर विजय प्राप्त करना चाहता था, वह अपने धर्मगुरु से मिला।
उन्होंने बाबर को अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि के मन्दिर को तोड़ने की सलाह दी, जो हिन्दू सैनिकों के मनोबल को प्रभावित करेगी। इस प्रकार बाबर ने अपने सेनापति मीरबाकी को जन्मभूमि मन्दिर तोड़ने का आदेश दिया। सन् 1528 में अयोध्या में आक्रमण करके जन्मभूमि पर बने मन्दिर को तोड़कर, मस्जिद निर्माण करने का प्रयास किया पर प्रचण्ड हिन्दू प्रतिकार के कारण वह सफल नहीं हुआ। इसी कारण वहाँ मीनारें नहीं बन सकी, वजू करने का स्थान भी नहीं बन सका। इस प्रकार वह मात्र एक ढांचा था, मस्जिद कदापि नहीं। ढाँचे के बाहर लगा हुआ फारसी में लिखा पत्थर “फरिस्तों का अवतरण स्थल” उस स्थान के जन्मभूमि होने की पुष्टि करता है।
एक जगह पर सीता पाक स्थान भी लिखा था। लगातार आक्रमण और संघर्ष के कारण अयोध्या में बहुत स्थान खाली हो गया था|

जन्मभूमि को पुनः प्राप्त करने के लिए किये गये संघर्षों की श्रखंला

क्रमांक  किसके समय मे  कब से कब तक  युद्ध   हिन्दुओं की ओर से कौन लड़ा
1 बाबर  1528-1530 ई 4 भीटी नरेश महताब सिंह, हंसबर के राजगुरु देवीदीन पाण्डेय, हंसबर के राजा रणविजय सिंह हंसबर की रानी जयराजकुमारी

2 हुमायूँ 1530-1556 ई. 10 साधुओं की सेना लेकर स्वामी महेशानंद जी।, स्त्रियों की सेना लेकर रानी जयराजकुमारी।

3 अकबर 1556-1606 ई 20 स्वामी बलरामाचार्य जी निरंतर लड़ते रहे।

4 औरंगजेब 1658-1707 ई 30 बाबा वैष्णवदास, गुरु गोविन्द सिंह, कुँवर गोपाल सिंह, ठाकुर जगदम्बा सिंह,ठा, गजराज सिंह

5 नवाब,सआदतअली 1770-1814 ई   5 अमेठी के राजा गुरुदत्त सिंह, पिपरा के राज कुमार सिंह

6 नासिरुद्दीन हैदर 1814-1836 ई. 3 मकरही के राजा

7 वाजिदअली शाह 1847-1857 ई. 2 बाबा उद्धवदास तथा श्रीरामचरण दास, गोण्डा नरेश देवी बख्श सिंह

8 अंग्रेजी शासन 1912-1934 2 साधु समाज और हिन्दू जनता सम्मिलित रूप में।

इस तरह राम जन्मभूमि के लिए करीब 76 युद्ध हुए।

manoj verma

लेखक मनोज वर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले करीब 33 सालों से

अयोध्या संबंधी घटनाक्रम को करीब से देखा है लिखा है।

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