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पश्चिम बंगाल; पत्रकार संगठन ने किया था सचेत, पर हिंसा की 150 घटनाओं को किया गया अनदेखा

Launch of Bleeding Bengal,N.M.M & L,teen murti (21)पश्चिम बंगाल में राजनैतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। कला और संस्कृति के लिए जानी जाने वाली यह धरती अब रक्तरंजित हो गई है। बीते कुछ समय में यहां इस तरह लोगों की हत्याएं हो रही हैं, मानो खून की होली खेली जा रही हो। हिंसा और अशांति फैलाने वाले लोग महिलाओं और बच्चों तक को नहीं को नहीं बख्श रहे।राजनैतिक हिंसा की इस आंधी में कई लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन लोग इसपर चुप्पी साधे बैठे हैं। न तो सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई हो रही है, न ही सोशल मीडिया पर कोई मुहिम छेड़ी जा रही है। अगर कुछ हो रहा है, तो वह है सिर्फ और सिर्फ राजनीति।तीन दिनों के अंदर हुई ऐसी दो घटनाओं के बारे में बता रहे हैं। जिनमें कुल चार हत्याएं हुईं।पर असल में तो19 मई 2019 से लेकर 21 जून 2019 के बीच 150 से ज्यादा राजनीतिक हिंसा की घटनाएं पश्चिम बंगाल में घटी।घटनाओं का यह आंकडा किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए अच्छा संकेत नहीं होता लेकिन मुख्य धारा की मीडिया ने इतनी बडी संख्या में घटी घटनाओें को जाने अनजाने अनदेखा किया। एनयूजे आई ने अपनी सामाजिक जिम्मदारी को समझा और इस राजनीतिक हिंसा पर एक दस्तावेजी पुस्तक जारी की। 

 हमलावरों ने पूरे परिवार को मार डाला

यह घटना पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई। बीते मंगलवार को 35 साल के शिक्षक बंधु प्रकाश पॉल, उनकी गर्भवती पत्नी और 6 साल के बेटे अंगन का खून से लथपथ शव उनके घर पर मिला। तीनों पर किसी धारदार हथियार से बर्बरता से वार किया गया था। बंधु प्रकाश को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ता बताया गया।
इस जघन्य घटना को लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। घटना के दो दिन बाद, गुरुवार को धनखड़ ने कहा कि ‘इस हत्याकांड से राज्य की कानून व्यवस्था की बदतर स्थिति नजर आती है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर धब्बा है। लेकिन तृणमूल सरकार की ओर से मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।’

42 वर्षीय पुजारी की हत्या

मुर्शिदाबाद की घटना के दो दिन बाद पश्चिम बंगाल के ही नादिया जिले में एक 42 वर्षीय पुजारी सुप्रियो बनर्जी की हत्या कर दी गई। गुरुवार को सुप्रियो का शव स्थानीय नदी के किनारे से बरामद हुआ। मृतक के घरवालों का कहना है कि ये हत्या पैसों के कारण हुई। लेकिन एक भाजपा नेता का दावा है कि सुप्रियो उनकी पार्टी का कार्यकर्ता था और राजनैतिक कारणों से उसकी हत्या की गई।भाजपा नेता बाबुल सुप्रियो ने इस संबंध में ट्वीट किया कि ‘बीते चार दिनों में आठ लोगों की हत्या हो चुकी है। पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था मजाक बन गई है। कथित लिबरल अब कहां हैं और इन हत्याओं पर क्यों चुप हैं? बंगाल के लोग इसका बदला लेंगे। देखिए और इंतजार कीजिए।’
इन हत्याओं पर जहां बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने इनकी ठीक तरह से जांच किए जाने की बात कही। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल पर ‘संवैधानिक लक्ष्मण रेखा’ पार करने का आरोप लगा दिया। साथ ही त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और बिहार में अपराध की घटनाओं पर नजर रखने की हिदायत दे डाली।

लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी पश्चिम बंगाल में राजनैतिक हिंसा की कई घटनाएं हुईं। छठे फेज के मतदान के दिन भी हिंसा हुई। जिसमें भाजपा के दो और तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई थी। 10 फरवरी 2019.. कृष्णगंज के तत्कालीन विधायक सत्यजीत बिस्वास की पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। तृणमूल कांग्रेस ने इस हत्या का आरोप भाजपा पर लगाया था। जबकि भाजपा ने इसे बकवास बताया था।28 मार्च 2019.. भाजपा नेता के भाई की पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हत्या कर दी गई। भाजपा ने इसका आरोप तृणमूल कांग्रेस पर लगाया था।

लोकसभा चुनाव के बाद हिंसा

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के बाद भी हिंसा की आग भड़की थी। तब ममता बनर्जी ने आधिकारिक रूप राजनैतिक हिंसा में 10 लोगों के मारे जाने की बात कबूली थी। तृणमूल के नेताओं का कहना था कि सबसे ज्यादा उनके लोग मारे गए हैं। जबकि भाजपा का कहना था कि उनके कार्यकर्ता ज्यादा मारे गए हैं और घायल हुए हैं।

पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र और राजनीतिक ​हत्याओं को लेकर पत्रकार संगठन ने किया था सचेत
http://citizensamvad.com/launch-of-bleeding-bengaln-m-m-lteen-murti-nuji-journalist/
Launch of Bleeding Bengal,N.M.M & L,teen murti (21)नयी दिल्ली 19 जुलाई । नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया और प्रभात प्रकाशन द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित एक समसामयिक शोध पुस्तक ब्लीडिंग बंगाल का विमोचन राजधानी के नेहरू  स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय में किया गया। यह पुस्तक मई 2019 से अबतक राज्य में हुई राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का तथ्यात्मक ब्यौरा सामने रखती है और राजनीतिक तथा प्रशासन के गिरते स्तर को ठोस घटनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करती है। पुस्तक के विमोचन पर वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने कहा कि देश में फासीवाद का कोई खतरा है तो पश्चिम बंगाल में है। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि बंगाल में अधिकांश मीडिया बिना कहे ही सरकार के आगे समर्पण कर गया है और सत्तारूढ़ दल की गलतियों को छापा नहीं जा रहा है। सुश्री बनर्जी का भतीजा मानो नवाब सिराजुद्दौला बन गया है। वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब आफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी ने कहा कि राजनतिक हिंसा के चलते बंगाल की जो छवि बन रही है उसे देख कर सुन कर शर्म आती है। लोकतंत्र में हिंसा का न तो कोई स्थान हो सकता है और न ही कोई उसका समर्थन कर सकता है। एनयूजे आई के राष्ट्रीय महासचिव मनोज वर्मा ने कहा कि मीडिया समाज का आइना है और यदि किसी राज्य में लगातार राजनीतिक हिंसा की घटनाएं हो रही है उसे देखकर मीडिया मूक दर्शक बना नहीं रह सकता।श्री वर्मा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि बंगाल की स्थिति लोकतंत्र के लिए गंभीर चिन्ता का विषय है। एनयूजे आई के राष्ट्रीय महासचिव मनोज वर्मा ने कहा एनयूजे आई ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हिंसा पर ‘ब्लीडिंग बंगाल’ नाम से जो पुस्तक रूपी दस्तावेज तैयार किया है उसमें घटनाओं का संकलित करने का काम किया है। मनोज वर्मा ने कहा सम सामायिक विषयों पर एनयूजे आई इस प्रकार की शोध परख रिपोर्ट समय समय पर जारी करता रहा है।
पत्रकार संगठन एनयूजे आई ने जारी की थी दस्तावेजी पुस्तक ‘ब्लीडिंग बंगाल’ 
Launch of Bleeding Bengal,N.M.M & L,teen murti (114)कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने कला, साहित्य, दर्शन, संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम की चेतना वाले इस राज्य को अफगानिस्तान में तब्दील कर दिया है जहां समाज को राजनीतिक कबीलों में बांट कर खूनी खेल खेला जा रहा है। मेदिनीपुर से सांसद एवं भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने दस्तावेज रिपोर्ट ‘ब्लीडिंग बंगाल’ के विमोचन के मौके पर उक्त विचार व्यक्त किये। इस पत्र में 19 मई 2019 के बाद राज्य में हुई राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का तथ्यात्मक विवरण दिया गया है जिसमें हिंसा का शिकार सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं,आम नागरिकों एवं एक पत्रकार का विवरण भी शामिल है। विमोचन समारोह में वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता, गौतम लाहिड़ी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे। एनयूजेआई के महासचिव मनोज वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने संचालन किया।
रक्तरंजित हो रही है कला और संस्कृति की धरती 
श्री घोष ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन ही नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुश्री बनर्जी कहा करतीं थीं कि वह दार्जिलिंग को स्विट्ज़रलैंड, दीघा को गोवा और कोलकाता को लंदन बना देंगी। लेकिन आज हालत यह है कि उन्होंने बंगाल को अफगानिस्तान बना दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में फिल्म कलाकार, डॉक्टर, वकील, पत्रकार सभी राज्य की सत्ता से भयभीत हैं और उससे घृणा करने लगे हैं।  उन्होंने कहा कि देश के अनेक राज्यों में राजनीतिक हिंसा का इतिहास रहा है। यह हिंसा चुनावों के लिये होती रही है। मगर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विचारधारा के लिए हत्याएं हो रहीं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में सामाजिक जातपात नहीं है लेकिन राजनीतिक दलों से प्रतिबद्धताओं के हिसाब से समाज में भी ध्रुवीकरण हो गया है। विराेधी विचारधारा की हत्या एवं उत्पीड़न जायज ठहराया जाता है। उन्होंने कहा कि वामपंथी शासन में शुरू हुई इस बुराई के खिलाफ जीत कर सत्ता में आयीं सुश्री बनर्जी भी इसी राह में चलने लगीं हैं।
 करीब सौ पत्रकारों की मौजूदगी में हुई चर्चा 
Launch of Bleeding Bengal,N.M.M & L,teen murti (56)एनयूजे आई के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राकेश आर्य ने भ्राी पश्चिम बंगाल में राजनीति हिंसा और मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखी।‘ब्लीडिंग बंगाल’ के विमोचन कार्यक्रम में राज्यसभा टीवी के सीईओ राहुल महाजन,लोकसभा टीवी के संपादक श्याम सहाय, पंचजन्य के संपादक हितेश शंकर,वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार,वरिष्ठ पत्रकार संध्या जैन,वरिष्ठ पत्रकार अजय सेतिया, वरिष्ठ पत्रकार राम नारायण श्रीवास्तव,वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद मुजुमदार,वरिष्ठ पत्रकार योजना गोसाई,वरिष्ठ पत्रकार आलोक गोस्वामी,वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडे,वरिष्ठ पत्रकार अतुल गंगवार, वरिष्ठ परिजात कौल,दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राकेश शुक्ला,उपाध्यक्ष अनुराग पुनेठा, सचिव सचिन भदौलिया,सचिव संजीव सिन्हा,सचिव मंयक सिंह,डीजेए की कार्यकारिणी के सदस्यआदित्य भारद्धाज,राज कमल, उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश वत्स, महामंत्री प्रदीप शर्मा सहित अनेक पत्रकारों ने भाग लिया।
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