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असम में भाजपा के किंगमेकर हिमंत बिस्व सरमा

himanta_biswa_sarma_11नई दिल्लीः असम में हुए विधानसभा चुनाव में यह किंग मेकर शब्द एक बार फिर जिंदा हो गया है. इस बार पार्टी से बाहर नहीं, बल्कि अंदर का ही आदमी किंग मेकर बना है. वह हैं हिमंत बिस्व सरमा का, असम के सीएम भले ही सर्वानंद सोनेवाल हैं, लेकिन चुनावी रणनीतिकार हिमंत बिस्व सरमा ही हैं. इसलिए इस चुनाव के परिणाम आने के साथ ही जोर-शोर से इस बात की चर्चा भी है कि असम में भाजपा जीती तो अगला सीएम कौन? जिस तराजू के जिस पलड़े में हिमंत बिस्व सरमा  का नाम रखा है, वह भारी है और नीचे झुका हुआ है.

कांग्रेस के भी मजबूत हाथ रहे हैं हिमंत
हिमंत की असम में मजबूती समझनी हो तो 2011 में असम में हुए चुनाव पर नजर डालते हैं. सीएम रहे तरुण गोगोई सरमा के राजनीतिक गुरु रहे हैं. गोगोई को 2011 का चुनाव हिमंत (Himanta Biswa Sharma) की रणनीति ने ही जितवाया था.सियासी गलियारा इसकी हामी भरता रहा है, लेकिन सियासी पंडित यह भी कहते हैं कि कांग्रेस में सरमा को वह अहमियत नहीं मिली जिसके वह हकदार थे.

कांग्रेस में नहीं हुई कद्र तो हुए नाराज
यह बात तब साफ हो गई जब तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई कांग्रेस से सांसद बन गए और शीर्ष धड़े के भी खास हो गए. 2001 से लगातार 2015 तक वह जालुकबारी विधानसभा से लगातार विधायक रहे और कांग्रेस की जीत की धुरी भी. लेकिन कांग्रेस ये नहीं समझ पाई. हिमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sharma) नाराज हो गए. साल 2016 असम में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी. इस कामयाबी के पीछे सीएम सर्बानंद सोनोवाल के अलावा हिमंत बिस्व सरमा का भी रोल था.हिमंत ने चुनाव से पहले उन्होंने कई बार राहुल गांधी से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हर बार राहुल से मिलने से रोका गया. इसके बाद वे नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए. भाजपा को दो तगड़े हाथ मिले और जीत भी मिली.

हिमंत बिस्व सरमा का करियर
हिमंत बिस्वा शर्मा (Himanta Biswa Sharma) का जन्म असम के जोराहाट में 01 फरवरी 1969 में हुआ था. राजनीति में प्रवेश करने से पहले वे कॉटन कॉलेज यूनियन सोसाइटी (CCUS) के महासचिव (GS) थे. 1996 से 2001 तक उन्होंने गोहाटी हाईकोर्ट में भी लॉ प्रैक्टिस की थी.

खेलों में रही है खास रुचि
हिमंत बिस्वा शर्मा (Himanta Biswa Sharma) को खेलों में विशेष रूचि है. साल 2017 में उन्हें भारत के बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया गया था. वह असम बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. जून 2016 में उन्हें असम क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष नियुक्त किया गया था.साल 2002 से साल 2016 तक सेवा करने वाले एसोसिएशन के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं.शर्मा ने कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. साल 2001 से 2015 तक जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने कांग्रेस का दबदबा कायम रखा. 15 साल तक वे इस सीट से विधायक रह चुके हैं.

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