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ममता बनर्जी को हराने वाले शुवेंदु अधिकारी को जानिए

adhikarकोलकाता: ममता बनर्जी  को शुवेंदु अधिकारी  ने हराकर नंदीग्राम से जीत हासिल कर ली है. 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में नंदीग्राम  विधानसभा सीट पर पूरा देश टकटकी लगाए देख रहा था. CM ममता के खिलाफ उनके पुराने साथी और बीजेपी नेता शुवेंदु ने दो-दो हाथ किया और वो दीदी को हराने में कामयाब हो गए.

ममता ने बंगाल जीता, नंदीग्राम गंवाया!

शुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 1622 वोटों से हरा दिया है. सबसे हाई प्रोफाइल सीट नंदीग्राम से दीदी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. दीदी ने बंगाल तो जीत लिया, लेकिन नंदीग्राम गंवा दिया. ममता बनर्जी और शुवेंदु अधिकारी के बीच काफी कड़ा मुकाबला देखा गया.हालांकि पिछली बार इस सीट से TMC के टिकट पर शुवेंदु ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार यहां कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन इस सीट से खुद सीएम ममता बनर्जी ताल ठोक रही थी. आपको सबसे पहले नंदीग्राम का इतिहास समझना चाहिए.

वर्ष 2006 के दिसंबर माह में नंदीग्राम के लोगों को हल्दिया विकास प्राधिकरण (HDA) की तरफ से नोटिस थमा दिया गया था कि नंदीग्राम का बड़ा हिस्सा जब्त किया जाएगा. इसके तहत 70 हजार लोगों को उनके घर से निकालने का प्लान था. उस वक्त भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत हुई और TMC ने इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया.14 मार्च 2007 को 14 ग्रामीणों पर गोलियां बरसा दी गईं और कई सारे लोग गायब हो गए. तृणमूल कांग्रेस इस आंदोलन में डटी रही. दीदी को राजनीतिक तौर पर इस आंदोलन का सबसे बड़ा फायदा मिला.2009 के लोकसभा चुनाव में ममता की पार्टी ने 19 सीटों पर विजय बिगुल बजाया. इसके बाद 2010 में हुए कोलकाता नगरपालिका चुनाव में भी ममता बनर्जी का जलवा दिखाई दिया. TMC ने 141 सीटों में से 97 सीटों पर कब्जा जमा लिया.नंदीग्राम वो सीट, जहां से 2011 में ममता की सत्ता का द्वार खुला था. वो सीट, जहां पर 2007 में ममता बनर्जी ने किसान आंदोलन की अगुआई की थी. तब शुवेंदु अधिकारी ने इस आंदोलन को मज़बूत बनाया था और टीएमसी की सरकार बनने का रास्ता साफ हुआ था. लेकिन इसी नंदीग्राम शुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हरा दिया है.

दीदी को हराने वाले शुवेंदु के बारे में जानिए

ममता बनर्जी को हराने वाले शुवेंदु अधिकारी का नंदीग्राम में जबरदस्त बोलबाला है. कांग्रेस के साथ 1995 में अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले शुवेंदु 2006 में कंथी दक्षिणी से पश्चिम बंगाल विधान सभा के सदस्य के रूप में टीएमसी से चुने गए. बाद में वह पश्चिम बंगाल सरकार में परिवहन मंत्री बने. 2009 और 2014 में तामलुक निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा में चुने गए.विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने 28 मई 2016 को लोकसभा से इस्तीफा दे दिया. 2016 में वह नंदीग्राम से पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए थे.

जानिए अधिकारी परिवार के बारे में?

बंगाल की राजनीति में अधिकारी परिवार की पकड़ किसी से अछूती नहीं है. शुवेंदु के पिता शिशिर अधिकारी की राज्य ही नहीं बल्कि केंद्र की राजनीति में भी अच्छी पकड़ रही है. वर्तमान में वो तृणमूल के लोकसभा सांसद है.शुवेंदु के भाई दिव्येंदु अधिकारी भी तामलुक लोकसभा से तृणमूल के सांसद हैं. नंदीग्राम से ममता ने लेफ्ट के विरुद्ध ऐसा बिगुल बजाया कि तीन से अधिक दशक का लेफ्ट की किला ढह गया. अब ममता बनर्जी को नंदीग्राम से रवाना कर दिया गया है. चुनाव से पहले शुवेंदु के पिता शिशिर अधिकारी ने भी भाजपा का दामन थाम लिया था.वहीं भाई के तृणमूल में होने के बावजूद शुवेंदु ने बीजेपी से ममता को चुनौती दिया. उन्होंने इतना कहा है कि अगर वो इस सीट पर कमल नहीं खिला पाएं तो राजनीति से संन्यास ले लेंगे. आखिरकार शुवेंदु अधिकारी ने जीत हासिल करके अपनी सियासत को बचा लिया.

नंदीग्राम का धार्मिक समीकरण

नंदीग्राम का धार्मिक समीकरण देखें तो, नंदीग्राम में 70% हिंदू हैं और 30% मुस्लिम है. अगर कुल वोटर की बात करें 2,13,000 वोटर में 1 लाख 51 हजार हिंदू वोटर हैं और 62 हजार मुस्लिम वोटर हैं. शायद यही फैक्टर ममता दीदी को मात देने में कामयाब हो गया.नंदीग्राम को अधिकारी परिवार का गढ़ कहा जाता है, इस सीट पर भले ही कांटे की टक्कर हुई हो लेकिन आखिरकार जीत जीत होती है और हार हार कहलाती है. दीदी काफी कम वोटों से हारी हैं, लेकिन ये उनके लिए एक बड़ा झटका है.

नंदीग्राम सीट का समीकरण समझिए

नंदीग्राम का समीकरण समझाने के लिए आपको इस सीट पर हुई पिछले तीन चुनावी जंग के बारे में बताते हैं. 2007 से पहले तृणमूल का वर्चस्व बंगाल में उतना दमदार नहीं था, जितना नंदीग्राम आंदोलन के बाद हुआ. 2006 के चुनाव की बार करें तो इस सीट से एसके. इलियास मोहम्मद (Illias Mahammad Sk.) ने ममता की पार्टी TMC के एसके सुपियां (Sk. Supian) को साढ़े 5 हजार से अधिक वोटों से हराया था.जिसके बाद 2011 के चुनाव में ममता की पार्टी ने नंदीग्राम से जीत हासिल की. नंदीग्राम में जीत के साथ ही दीदी को पहली बार सीएम की कुर्सी पर बैठने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. इस बार TMC की फिरोजा बीबी ने CPI के परमानंद भारती को 40 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी.2016 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से TMC के बैनर तले शुवेंदु अधिकारी मैदान में उतरे और उन्होंने CPI के अब्दुल कबीर शेख को 81 हजार 230 वोटों से हराया.

ममता ने क्यों चुना नंदीग्राम?

2011 और 2016 में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल (West Bengal) की भवानीपुर सीट से विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं. लेकिन इस बार उन्होंने नंदीग्राम के लिए भवानीपुर की सुरक्षित सीट छोड़ दी. टीएमसी और बीजेपी के लिए नंदीग्राम की सीट आखिर नाक की लड़ाई क्यों बन चुकी थी?ममता ने खुद अपने पुराने साथी शुवेंदु को चैलेंज किया और नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की मानें तो वो 2024 में दिल्ली कूच भी कर सकती हैं, लेकिन ममता दीदी खुद ही नंदीग्राम से चुनाव हार गई हैं, ये उनके लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं होगा.

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