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पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनाव प्रचार से गायब रहा गांधी परिवार ?

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में पहले चरण की 30 विधानसभा सीटों  पर चुनाव प्रचार गुरुवार को शाम पांच बजे थम गया. इन सीटों पर 27 मार्च को मतदान होगा. पहले चरण की 30 सीटें आदिवासी बहुल पुरुलिया, बांकुरा, झारग्राम, पूर्वी मेदिनीपुर और पूर्वी मेदिनीपुर जिलों में फैली हुई हैं. इन क्षेत्रों को एक समय वाम दलों के प्रभाव वाला माना जाता था. भाजपा के बड़े नेताओं ने पुरुलिया, झारग्राम और बांकुड़ा जिलों में रैलियों को संबोधित किया और ‘सोनार बांग्ला’ बनाने के लिए वास्तविक बदलाव लाने का वादा किया.पहले चरण में जिन सीटों पर मतदान होना है उनके लिए भाजपा के स्टार प्रचारकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए. इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी पार्टी का प्रचार किया. लेकिन कांग्रेस के सबसे बड़े स्टार प्रचारक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी गायब रहे. जबकि इन सबका नाम स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी था. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव प्रचार की कमान संभाल रखी है. गांधी परिवार दूसरे दौर में भी प्रचार करेंगे या नहीं इसकी फिलहाल गारंटी नहीं है.

कांग्रेस का ‘केरल संकट’
कांग्रेस के लिए इधर कुआं और उधर खाई जैसे हालात हैं. कांग्रेस पश्चिम बंगाल में लेफ्ट के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है. जबकि केरल में वो वाममोर्चा के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं. ऐसे में उन्हें लग रहा है कि लेफ्ट के साथ प्रचार करने पर केरल में उनकी चुनौती कमज़ोर हो सकती है. लिहाजा पार्टी केरल में मतदान तक बंगाल में प्रचार से परहेज कर रही है. ऐसे में राहुल गांधी अभी तक चुनाव प्रचार में नहीं उतरे हैं. जबकि वो केरल और असम में लगातार चुनाव प्रचार कर रहे हैं. कांग्रेस को लग रहा है कि अगर बंगाल में वो लेफ्ट के साथ एक मंच पर दिखाई देंगे, तो इसका केरल में अच्छा संदेश नहीं जाएगा. एक सवाल ये भी है कि बंगाल के मंच पर लेफ्ट की तारीफ कर केरल के मंच पर लेफ्ट को किस तरह से घेरा जा सकेगा.

कांग्रेस की मुश्किलें
इतना ही नहीं बंगाल में कांग्रेस के लिए दूसरी चिंता ये है कि ज्यादा आक्रमक होकर चुनाव प्रचार करने से बीजेपी को फायदा मिल सकता है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जीत की संभावनाओं को भी ठेस पहुंच सकती है. राज्य में TMC और कांग्रेस के बीच नजदीकियां अभी खत्म नहीं हुई है. कांग्रेस को लगता है कि अगर ममता बनर्जी हार जाती हैं तो 2024 में भाजपा के खिलाफ विपक्ष की लड़ाई कमजोर पड़ सकती है.

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