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लोगों की जान के दुश्मन ‘ कोरोना मरकज’ के मौलाना!

Nizamuddin-markazनई दिल्ली तबलीगी जमात के मुख्यालय निजामुद्दीन मरकज की लापरवाही ने इसे देश में कोरोना वायरस का सबसे बड़ा कैरियर बना दिया है। आलम यह है कि पिछले 24 घंटे में देश में जो 386 नए केस आए, उनमें से 164 तो सिर्फ तबलीगी जमात से जुड़े लोगों के हैं। तबलीगी जमात के अमीर मौलाना मुहम्मद साद कंधलावी और 7 अन्य लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने केस भी दर्ज कर लिया है और उसके बाद से ही मौलाना फरार हैं। सवाल लाजिमी है कि पब्लिक सेफ्टी और हेल्थ को जोखिम में डालने वाले गैरजिम्मेदार मौलाना को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।पूरी दुनिया में कोरोना वायरस ने कोहराम मचा रखा है, इसकी वजह से हजारों मौतें हो चुकी हैं। भारत में भी इसके बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए सरकार की ओर से लॉकडाउन किया गया, साथ ही लोगों से सोशल डिस्टेंस का पालन करने की अपील की गई। सड़कें, बाजार यहां तक की मंदिर मस्जिद और धार्मिक स्थल सूने पड़े हैं। ऐसे गंभीर हालात में दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात का मरकज न केवल कोरोना का हॉटस्पॉट बनकर सामने आया है, बल्कि लोगों की जान का दुश्मन बनता दिख रहा है। इसके विलेन के तौर पर उभरा है तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद। सवाल उठ रहे हैं कि अगर मौलाना साद की कोई गलती नहीं है तो फिर वह एफआईआर दर्ज होते ही गायब क्यों हो गए?

हाइलाइट्स

  • लॉकडाउन की धज्जियां उड़ा निजामुद्दीन में देश-विदेश से सैकड़ों लोग मरकज में इकट्ठे रहे, सोती रही दिल्ली पुलिस
  • लॉकडाउन के दौरान शादियां करने वालों के खिलाफ तो केस दर्ज हुए लेकिन मरकज के ‘गुनहगारों’ पर नहीं हुआ ऐक्शन
  • जब कई राज्यों में तबलीगी जमात के कुछ लोगों को कोरोना हुआ और 8 की मौत हुई तब जाकर दर्ज किया गया केस
  • निजामुद्दीन मरकज को पुलिस ने अब खाली करा लिया है लेकिन मौलाना साद अब तक वह फरार हैं
  • अगर मौलाना साद की कोई गलती नहीं है तो फिर वह एफआईआर दर्ज होते ही गायब क्यों हो गए?

मौलाना साद क्यों बने विलेन
nijamudin leadमौलाना साद पर ये आरोप इसलिए लग रहे हैं क्योंकि जब पूरी दुनिया में कोरोना का कहर छाया हुआ है, लोगों को घरों में रहने की अपील की गई थी उस समय तबलीगी मरकज जमात में हजारों की संख्या में लोग जमा थे, बावजूद इसके मौलाना साद ने गैरजिम्मेदाराना व्यवहार करते हुए इसकी जानकारी पुलिस और दिल्ली सरकार तक को देना मुनासिब नहीं समझा। यही नहीं इस बीच जमात के मुखिया का एक ऑडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें दावा किया जा रहा कि आवाज मौलाना साद की है। इसमें मौलाना साद कह रहे हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग की कोई जरूरत नहीं है, और न ही यह हमारे धर्म में कहीं लिखा है। मौलाना साद के इस कथित ऑडियो क्लिप में कुछ लोग उनकी ‘हां में हां’ मिला रहे हैं।वायरल ऑडियो में मौलान साद कहते सुनाई दे रहे कि अल्लाह मुझे माफ फरमाए जिनकी अक्लों पर गैरों का तसल्लुफ होता हूं वो इनको ये मशविरे देते हैं कि आप मस्जिदें बंद कर दें, लोग जमा ना हों, मैंने शुरू में आपको मिसाल दे दी थी जो अल्लाह की तरफ से सबसे बड़ा अजान है रुकना, जिससे सिर्फ इंसान नहीं हर मकरूफ हलाकत की तरफ जाते हैं, जिनके पानी को अल्लाह ताला ने हर जानदार के लिए हयात का जरिया बनाया है। इससे बड़ा आजाब कोई नहीं है। इस आजाब को हटाने के लिए औरतों को, बच्चों को, भैंसों को, ऊंटों को, बकरियों को, बैलों को सबको साथ लेकर आओ मैदान में।वायरल ऑडियो में मौलान साद आगे कहते हैं कि बस इस वक्त की जरूरत ये है कि एक तो मसलों को आबाद करो, दूसरा काम ये है कि अल्लाह की वाहदानियत को ज्यादा बयान करो वरना अल्लाह की जात पर यकीन ना रखने वालों कि चालें और स्कीमें, वो मुसलमानों को बीमारी से बचाने के बहाने से मुसलमानों को रोकने के लिए आ गई हैं, उन्हें तरकीब समझ आ गई है कि मुसलमानों को रोकने और बिखेरने का ताकि इनके दिल में हमेशा के लिए ये बातें बैठ जाएं कि बीमारी उड़कर लगती है, किसी के पास मत जाओ, किसी के पास मत बैठो, आज अगर इस बीमारी की वजह से मुसलमान के यकीदद में बदल जाता है, बीमारी खत्म हो जाएगी मगर यकीदद खत्म नहीं होगी।

दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
पूरे मामले में दिल्ली पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। लॉकडाउन के दौरान तमाम ऐसे मामले आए जब शादी समारोह करने वालों के खिलाफ केस दर्ज किए गए, लेकिन मरकज में लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाने वालों पर केस दर्ज करने में हीलाहवाली क्यों होती रही? केस भी तब दर्ज किया गया जब निजामुद्दीन में हुए जलसे में शिरकत करने वाले 6 लोगों की तेलंगाना और 1 शख्स की जम्मू-कश्मीर में मौत हो गई और कई अन्य इस घातक वायरस के चपेट में आ गए। भारत से पहले पाकिस्तान में तबलीगी जमात कोरोना वायरस संक्रमण के एक बड़े कैरियर के तौर पर उभरा था। इसके बाद भी यहां सख्ती नहीं की गई।

लॉकडाउन की धज्जियां उड़ा लोगों से मस्जिद आने को कहता रहा मौलाना
दिल्ली पुलिस बार-बार मरकज से भीड़ हटाने को कहती रही लेकिन जमात के अमीर मौलाना मुहम्मद साद कंधलावी ने अपनी जिद से हजारों लोगों की जान जोखिम में डाल दी। मरकज से लोगों को हटाने के बजाय मौलाना लोगों से यह अपील करते रहे कि अगर मस्जिद आने से मौत होती है तो इसके लिए मस्जिद से अच्छी कौन सी जगह होगी। मौलाना का यह कथित ऑडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है।

तबलीगी जमात पर आतंकवाद से कनेक्शन के भी आरोप
न्यूज एजेंसी आईएएनएस की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक तबलीगी जमात के कई सदस्य आतंकवादी गतिविधियों में भी लिप्त पाए गए हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश में तबलीगी जमात की शाखाएं भारत के खिलाफ जिहाद और आतंकवाद फैलाने में शामिल रही हैं। अमेरिका पर हुए 9/11 आतंकी हमले में शामिल अल कायदा के कुछ आतंकियों के भी तबलीगी जमात से लिंक मिले हैं। आईएएनएस की रिपोर्ट में भारतीय जांचकर्ताओं और पाकिस्तानी सुरक्षा विश्लेषकों के हवाले से बताया गया है कि हरकत-उल-मुजाहिदीन का असली संस्थापक भी तबलीगी जमात का सदस्य था। इसी आतंकी संगठन ने 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण किया था। 80-90 के दशक में जमात से जुड़े 6,000 से ज्यादा सदस्यों ने पाकिस्तान में हरकत-उल-मुजाहिदीन के कैंपों में आतंकी ट्रेनिंग ली थी जिसका उद्देश्य अफगानिस्तान से सोवियत फोर्सेज को भगाना था।

क्या है तबलीगी जमात?
निजामुद्दीन एपिसोड ने तबलीगी जमात और मौलाना मुहम्मद साद कंधलावी को पूरे देश में चर्चा में ला दिया है। तबलीगी जमात की स्थापना मौलाना मुहम्मद इलियास कंधलावी ने 1926 में की थी। इसका उद्देश्य सुन्नी मुस्लिमों को इस्लाम की शिक्षाओं के प्रति प्रतिबद्ध बनाना था। जमात का दावा है कि वह पूरी तरह अराजनीतिक संगठन है।स्थापना के कुछ ही वर्षों में तबलीगी मूवमेंट का प्रसार दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के तमाम देशों में हो गया। आज अमेरिका, यूरोपीय देश समेत करीब 200 देशों में जमात सक्रिय है। इसका मुख्यालय दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित बंगलेवाली मस्जिद है। दुनियाभर से तबलीगी गतिविधियों के लिए भारत आने वाले लोग सबसे पहले इसी मस्जिद में रिपोर्ट करते हैं। इसके बाद ही वे भारत के अन्य मरकजों में जाते हैं।

मौलाना साद का भी विवादों से पुराना नाता
केस दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहे मौलाना मुहम्मद साद का विवादों से पुराना नाता है। मौलाना ने जिस तरह खुद को तबलीगी जमात का एकछत्र अमीर (संगठन का सर्वोच्च नेता) घोषित कर दिया, उससे जमात में ही फूट पड़ गई। दरअसल 1926 में मौलाना मुहम्मद इलियास द्वारा तबलीगी जमात की स्थापना के बाद से 1995 तक नेतृत्व के खिलाफ असंतोष के बिना यह मूवमेंट चलता रहा। 1992 में जमात के तत्कालीन अमीर मौलाना इनामुल हसन ने जमात की गतिविधियों को चलाने के लिए लिए 10 सदस्यीय एक शूरा का गठन किया। 1995 में मौलाना की मौत के बाद उनके बेटे मौलाना जुबैरुल हसन और एक अन्य सीनियर तबलीगी मेंबर मौलाना साद ने एक साथ शूरा का नेतृत्व किया। मार्च 2014 में जब मौलाना जुबैरुल हसन की मौत हो गई तो मौलाना साद ने खुद को जमात का एकछत्र नेता यानी अमीर घोषित कर दिया।

2 साल पहले मौलाना साद की वजह से दो फाड़ हुआ तबलीगी जमात
तबलीगी गतिविधियों से कई वर्षों तक जुड़े रहे मुंबई बेस्ड एक मौलाना ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि खुद को अमीर घोषित करने के बाद मौलाना साद मनमाना फैसले लेने लगे। इससे जमात के अंदरखाने कई वरिष्ठ सदस्यों में नाराजगी बढ़ने लगी। मौलाना साद की कार्यशैली से आखिरकार 2 साल पहले तबलीगी जमात दो फाड़ हो गया। 2 साल पहले मौलाना अहमद लाड और इब्राहिम देवली के नेतृत्व में जमात का एक दूसरा गुट वजूद में आया, जिसका मुख्यालय मुंबई के नजदीक नेरूल की एक मस्जिद है।

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