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शिकागो में विश्व हिंदू कांग्रेस,जुटे 80 देशों के लोग

hindu leadशिकागो। उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने हिंदू धर्म के सच्चे मूल्यों के संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हिंदू शब्द को अछूत और असहनीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। शिकागो में दूसरी विश्व कांग्रेस कांग्रेस सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।हजारों सालों से हिंदुओं के प्रताड़ित रहने पर अफसोस जाहिर करते हुए राष्ट्रीय hindu 4स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदुओं से एक होने की अपील की और कहा कि ‘यदि कोई शेर अकेला होता है, तो जंगली कुत्ते भी उस पर हमला कर अपना शिकार बना सकते हैं.’ उन्होंने समुदाय के नेताओं से अपील की कि वे एकजुट हों और मानवता की बेहतरी के लिये काम करें. दूसरी विश्व हिंदू कांग्रेस (डब्ल्यूएचसी) में यहां शामिल 2500 प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि हिंदुओं में अपना वर्चस्व कायम करने की कोई आकांक्षा नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘हिंदू समाज तभी समृद्ध होगा जब वह समाज के रूप में काम करेगा.’

हिंदू धर्म के मूल्यों को बचाने की जरूरत

naidu hinduबता दें कि शिकागो में स्वामी विवेकानंद के 11 सितंबर, 1893 को दिए गए भाषण के 125 साल पूरे होने पर विश्व हिंदू कांग्रेस में 80 देशों ने हिस्सा लिया। द्वितीय विश्व हिन्दू कांग्रेस में उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने स्वामी विवेकानंद को याद किया। उप-राष्ट्रपति ने हिन्दू कांग्रेस में कहा कि हिन्दुत्व जीवन जीने की पद्धति है। इस मौके पर वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत सार्वभौमिक सहनशीलता में विश्वास करता है। साथ ही सभी धर्मों को सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि साझा करना और ख्याल रखना हिंदू दर्शन के मूल तत्व हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के सच्चे मूल्यों को बचाने की जरूरत है, जिससे ऐसे विचारों और प्रकृति को बदला जा सके जो गलत सूचनाओं पर आधारित हैं।उन्होंने यहां कहा, ‘सही राष्ट्रवाद इस अमूल्य विरासत का संरक्षण है। हमें मूल्यों को जीना चाहिए और विचारों को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करना चाहिए ताकि दुनिया का सबसे प्रामाणिक परिप्रेक्ष्य हो। यह विकृतियों और गलत धारणाओं को जमीनी स्तर पर आने से पहले रोक देना चाहिए। ताकि दुनिया के सामने सबसे प्रामाणिक बातें सामने आ सकें।’

hindu 5भारत को विश्व गुरु माना जाता था

उन्होंने कहा, ‘हम नाग पंचमी पर सांप को दूध पिलाते हैं जबकि कई बार सांप हमें काट लेता है। हम चींटी को चीनी खिलाते हैं जबकि कई बार चींटी भी हमें काट लेती है। दरअसल, पशु-पक्षी सहित सबको साथ लेकर चलना और सबका ख्याल रखना हिंदू की पद्धति है।’ उन्होंने कहा कि केवल भारत ही अकेला ऐसा देश है, जिसने सभी धर्मों को उनके वास्तविक रूप में स्वीकार किया। एक समय में भारत को विश्व गुरु माना जाता था। उन्होंने कहा कि हमारे संस्कृति में महिलाओं को इतना सम्मान दिया जाता है कि देश में सारी नदियों का नाम महिलाओं के नाम पर है। यहां तक कि हम लोग देश को पितृभूमि नहीं मातृभूमि कहते हैं।

‘हिंदू एक साथ आएंगे, तभी तरक्की होगी’

hindu 6बता दें कि इसी कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवन ने शुक्रवार को कहा था कि हिंदू हजारों सालों से प्रताड़ित हो रहे हैं, क्योंकि वे अपने मूल सिद्धांतों का पालन करना और आध्यात्मिकता भूल गए हैं। हमें साथ आना होगा। हिंदू समाज तभी प्रगति करेगा, जब वह समाज के रूप में काम करेगा। भागवत ने कहा कि हिंदू किसी का विरोध करने के लिए नहीं जीते, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हो सकते हैं, जो हमारा (हिंदुओं) विरोध करते हैं। वे हमें नुकसान न पहुंचाएं, इसके लिए हमें खुद को तैयार करना होगा।उपराष्ट्रपति नायडू ने रविवार को संयुक्त राज्य अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस के दौरान सूरीनाम गणराज्य के उपाध्यक्ष अधिन अश्विन से मुलाकात की। इसके अलावा यहां नायडू ने इलिनाय के 11 वें जिले बिल फोस्टर से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य से भी मुलाकात की।

भारत की ओर देख रही पूरी दुनिया: वेंकैया

इससे पहले शनिवार को शिकागो में तेलुगु अमेरिकी समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा था कि पिछले चार सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारत ने बहुत तेज विकास किया है और अब पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। नायडू ने कहा, ‘पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था धीमी हो गई है। केवल भारत की अर्थव्यवस्था है जो इस दौर में भी प्रगति कर रही है।’ इस दौरान उन्होंने एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) जैसे विभिन्न वैश्विक आर्थिक संस्थानों के विकास संबंधी ताजा आंकड़ों और तथ्यों का भी उल्लेख किया। तेलुगु में दिए अपने भाषण में उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘जब मैं शहरी विकास मंत्री था, तब 35-40 राजदूत मुझसे मिले थे। वे सभी भारत में निवेश करना चाहते थे।’ नायडू ने देश में हो रहे सुधार को व्यापक जनसमर्थन मिलने पर अपनी प्रसन्नता भी जताई। उन्होंने तेलुगु समुदाय से भारत के विकास कार्यों में भागीदार होने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वह तेलुगु अमेरिकी समुदाय की सफलता पर गर्व महसूस करते हैं।

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत

अमेरिका के शिकागो शहर में विश्व हिंदू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुओं में किसी दूसरे पर वर्चस्व स्थापित करने की आकांक्षा नहीं है। वे तभी समृद्ध होंगे, जब एकजुट होकर काम करेंगे। उन्होंने हिंदुओं से मानव कल्याण के लिए एकजुट होने और मिलकर काम करने का आह्वान किया। सम्मेलन में बतौर मुख्य वक्ता भागवत ने वैश्विक एकता के लिए कुछ मूल्यों पर भी जोर दिया।उन्होंने कहा कि अहंकार को नियंत्रित और आम सहमति को स्वीकार करना सीखकर पूरी दुनिया को एक टीम में तब्दील किया जा सकता है। सात से नौ सितंबर तक चलने वाला यह विश्व हिंदू सम्मेलन स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण की 125वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित किया गया है। स्वामी विवेकानंद ने साल 1893 में शिकागो में आयोजित धर्म संसद में भाषण दिया था। हर चार साल पर होने वाले इस सम्मेलन में इस बार 80 देशों के ढाई हजार से ज्यादा प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं।हिंदू प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा, ‘अगर एक शेर अकेले रहता है तो जंगली कुत्ते हमला करके उसे खत्म कर सकते हैं। हमें इसे नहीं भूलना चाहिए। हम दुनिया को बेहतर बनाना चाहते हैं। हमारी वर्चस्व स्थापित करने की अभिलाषा नहीं है। हमारा प्रभाव जीत या औपनिवेशीकरण का परिणाम नहीं है।’ सम्मेलन की थीम ‘सुमंत्रिते सुविक्रांते’ यानी ‘सामूहिक विचार, साहस हासिल करें’ का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा, हिंदू समाज तभी समृद्ध होगा, जब वह एकजुट होकर काम करेगा।’ उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में प्रतिभावान लोगों की बड़ी संख्या है लेकिन वे कभी एक साथ नहीं आते हैं। हिंदुओं का एक साथ आना अपने आप में मुश्किल काम है।संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि हिंदू हजारों साल से प्रताडित हो रहे हैं क्योंकि वे अपने मूल सिद्धांतों और आध्यात्मिकता को भूल गए हैं। उन्होंने कहा कि हिंदु किसी का विरोध करने के लिए नहीं जीते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग हो सकते हैं जो हमारा विरोध कर सकते हैं।

मोहन भागवत ने कहा, ‘हमारे काम के शुरुआती दिनों में जब हमारे कार्यकर्ता हिंदुओं को एकजुट करने को लेकर उनसे बातें करते थे तो वे कहते थे कि ‘शेर कभी झुंड में नहीं चलता’. लेकिन जंगल का राजा शेर या रॉयल बंगाल टाइगर भी अकेला रहे तो जंगली कुत्ते उस पर हमला कर अपना शिकार बना सकते हैं.’     हिंदू समाज में सबसे अधिक प्रतिभावान लोगों के होने का जिक्र करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘हिंदुओं का एक साथ आना अपने आप में एक मुश्किल चीज है.’ उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में कीड़े को भी नहीं मारा जाता है, बल्कि उस पर नियंत्रण किया जाता है.

भागवत ने कहा, ‘हिंदू किसी का विरोध करने के लिए नहीं जीते. हम कीड़े-मकौड़ों को भी जीने देते हैं. ऐसे लोग हैं जो हमारा विरोध कर सकते हैं. आपको उन्हें नुकसान पहुंचाए बगैर उनसे निपटना होगा.’ उन्होंने कहा कि हिंदू वर्षों से प्रताड़ित हैं, क्योंकि वे हिंदू धर्म और आध्यात्म के बुनियादी सिद्धांतों पर अमल करना भूल गए हैं. सम्मेलन में हिस्सा ले रहे लोगों से भागवत ने अपील की कि वे सामूहिक रूप से काम करने के विचार को अमल में लाने के तौर-तरीके विकसित करें. भागवत ने कहा, ‘हमें एक होना होगा.’ उन्होंने कहा कि सारे लोगों को किसी एक ही संगठन में पंजीकृत होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यह सही पल है. हमने अपना अवरोहण रोक दिया है. हम इस पर मंथन कर रहे हैं उत्थान कैसे होगा.  हम कोई गुलाम या दबे-कुचले देश नहीं हैं. भारत के लोगों को हमारी प्राचीन बुद्धिमता की सख्त जरूरत है.’

हिंदू धर्म जीने की पद्धति : अनुपम 
सम्मेलन में अभिनेता अनुपम खेर ने कहा कि हिंदू धर्म जीने की पद्धति है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के संदेश का मुख्य सार सहिष्णुता है। कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी होने के बावजूद पिछले 28 साल से इसी सहिष्णुता की राह पर चल रहे हैं।
अनुपम ने कहा, उनके जैसे शिमला के मध्यवर्गीय परिवार के कश्मीरी पंडित लड़के के लिए यहां विश्र्व हिंदू कांग्रेस में बोलने का मौका मिलना एक बड़ी उपलब्धि है। हिंदुत्‍व यानी सहिष्णुता व प्यार भारतवंशी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि सहिष्णुता, प्यार, विविधता और समावेश हिंदुत्व के पहलू हैं जो लोगों को उनके धर्मों की परवाह किए गए बगैर अपनाता है।

 

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