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तीन साल में कई गुना बढ़ा योगी का कद

manoj vermaउत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है. इस दौरान खुशी और निराशा के कई अवसर आए. सत्ता के अनुभव की कमी के बावजूद योगी ने कदम-कदम पर सीखने, समझने और एक्शन लेने में हिचक नहीं दिखाई. मोदी-शाह की जोड़ी ने भी जो भी टास्क और हुक्म दिया, योगी ने उसे पूरा करने में पूरी एनर्जी लगाई. योगी ने दिन-रात काम करके खुद को साबित कर दिखा. शायद इसी का नतीजा है कि बीजेपी में मोदी-शाह के बाद तीसरे सबसे कद्दावर नेता के तौर पर अपना सियासी कद बनाया.

नोएडा जाने का मिथक तोड़ा

योगी आदित्यनाथ ने केंद्र की मोदी सरकार की योजनाओं को यूपी की जमीन पर उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने नोएडा जाने का मिथक तोड़ा. एक बार नहीं, कई बार नोएडा आए. भव्य कुंभ का आयोजन. क्राइम और करप्शन पर उनकी जीरो टॉलरेंस और यूपी में दो बार सफल इन्वेस्टर्स समिट उनकी उपलब्धियों में हैं. सूबे में सीएए विरोधियों पर कड़ा एक्शन और प्रदर्शनकारियों से जुर्माना वसूलने से लेकर हिंदुत्व की छवि को सीएम रहते हुए योगी ने बरकरार रखा, उससे सरकार ही नहीं बल्कि पार्टी पर भी पकड़ मजबूत हुई है.

मोदी-शाह की नाराजगी की चर्चा भी चली

योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के पद से हटाने की बातें पिछले तीन साल में कई बार उड़ीं. ये भी कहा गया कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी उनसे नाराज है और उनकी केंद्र में चलती नहीं, लेकिन योगी इन सबकी परवाह किए बगैर अपने मिशन को धार देने में जुटे रहे.यूपी उपचुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद लोकसभा चुनाव योगी सरकार के लिए बड़ा चैलेंज था. सपा-बसपा गठबंधन ने सिरदर्द बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. सूबे में तमाम मिथक, कयास और गठबंधनों के बावजूद बीजेपी ने यूपी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 62 सीटें जीतीं, इसका श्रेय योगी आदित्यनाथ को मिला.

विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा रैलियां कीं

गुजरात से लेकर कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में मोदी-शाह के बाद सबसे ज्यादा रैलियां सीएम योगी ने किया. इसके अलावा कर्नाटक और त्रिपुरा में नाथ संप्रदाय को बीजेपी ने सीएम योगी के सहारे साधने का काम किया है. लोकसभा चुनाव पश्चिम बंगाल में बीजेपी बेहतर नतीजों के पीछे योगी आदित्यनाथ की रैलियों का बड़ा योगदान माना जाता है.

संगठन और सरकार में बनाई पकड़

हालांकि मार्च 2017 में यूपी में दो डिप्टी सीएम का फैसला होते ही यह साफ हो गया था कि सूबे में सत्ता के एक नहीं कई केंद्र होंगे. डिप्टी सीएम केश्व प्रसाद मौर्य की राजनीतिक महत्वाकांक्षा किसी से छिपी नहीं है. इसके बावजूद सीएम योगी ने पिछले तीन सालों में अपने कार्यों और राजनीतिक एजेंडे के जरिए जिस तरह बीजेपी संगठन और सरकार पर पकड़ बनाई है, उसे सूबे में न तो पार्टी के अंदर और न ही विपक्ष में कोई चुनौती देता नजर आ रहा है. इससे साफ है कि देश में मोदी-शाह बीजेपी को कई तीसरी सबसे बड़ा नाम है तो वह योगी आदित्यनाथ का है.

BJP मिशन-2022 को फतह करने में अभी से जुटी

मुख्यमंत्री आवास पर योगी आदित्यनाथ और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की अध्यक्षता में सांसदों, विधान परिषद सदस्यों, आयोगों और बोर्ड अध्यक्षों की बैठक 2022 में होने वाले चुनाव की रणनीति को बनाई है. सूबे के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों को लेकर अलग-अलग चरण में रणनीति बना रही है.

उत्तर प्रदेश में करीब 80 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां तमाम कोशिशों के बाद भी बीजेपी लोकसभा चुनाव 2014, विधानसभा चुनाव 2017 और लोकसभा चुनाव 2019 में जीत हासिल नहीं कर सकी थी. स्वतंत्र देव ने कहा कि मोदी-योगी सरकार की योजनाओं के दम पर बीजेपी 2022 में फिर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आएगी.

मिशन 2022 के लिए बीजेपी ने अपनी रणनीति के हिसाब से पहले चरण में उन सीटों पर ध्यान देना है, जहां 2017 के विधानसभा और 2014-2019 लोकसभा में पार्टी को जीत नहीं मिली थी. बीजेपी इन सीटों पर प्रभारी नियुक्त किए हैं. प्रभारी इन सीटों पर जाकर अभी से वहां की स्थितियों और समीकरण के अनुसार रणनीति बनाएं और लोगो को पार्टी से जोड़ने की दिशा में काम करेंगे.

उत्तर प्रदेश बीजेपी के संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने भी कहा है कि प्रत्येक प्रभारी को हर महीने अपने प्रभार वाले वाले विधानसभा क्षेत्र में चार दिन प्रवास करना होगा. बूथ अध्यक्ष से लेकर जिलाध्यक्ष स्तर के पदाधिकारी से बातचीत कर मोदी-योगी सरकार की योजनाओं की स्थिति, मंत्रियों और विधायकों के बीच मतभेद, सांसद-विधायकों के मतभेद, वहां हुए विकास कार्यों, आवश्यकताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर मंथन करेंगे.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनवा की तैयारियों को लेकर बीजेपी ने तीन सदस्यीय कोर कमेटी गठित की है. इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और महामंत्री संगठन सुनील बंसल को शामिल किया गया है. ये कमेटी हर महीने विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारियों के साथ समीक्षा करेगी. प्रभारियों से मिले फीडबैक के आधार पर विधानसभा क्षेत्रों का रोडमैप तैयार किया जाएगा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि शुरू से हिंदूवादी नेता की रही है. यूपी की बागडोर संभालने के बाद भी उनकी यह छवि बदली नहीं है. योगी सरकार के तीन साल के कार्यकाल को देखा जाए तो ऐसा प्रतीत होता है कि उनके एजेंडे से हिंदुत्व गायब नहीं हुआ है. इन तीन वर्षों में सीएम योगी ने न सिर्फ अयोध्या-मथुरा-काशी फोकस किया बल्कि दूसरे कई मसलों पर कड़ाई से एक्शन लिया जिसे हिंदुत्व के एजेंडे से ही जोड़कर देखा गया चाहें वो आजम खान का मामला हो या फिर सीएए.

राम मंदिर ही नहीं मथुरा-काशी पर मेहरबान

मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही योगी आदित्यनाथ का अयोध्या-मथुरा-काशी के विकास पर खास फोकस रहा है. फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या रखा और अब दुनिया की सबसे ऊंची भगवान राम की प्रतिमा लगाए जाने की तैयारी है. योगी सरकार सूबे में जब से आई हैं हर साल अयोध्या में सरयू के तट पर पांच लाख दीयों को प्रज्जवलित कर भव्य दिवाली मनाई जा रही है, जिसमें सीएम खुद पूरी कैबिनेट के साथ शामिल होते हैं.

सीएम बनने के बाद तो उन्होंने अयोध्या में सरयू नदी की भी आरती शुरू करवाई. वहीं, मथुरा में जाकर जन्माष्टमी और होली योगी मनाते हैं. योगी सरकार ने अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण के लिए करीब 150 एकड़ जमीन के लिए लैंडबैंक बनाया है. इसके अलावा अयोध्या से लेकर चित्रकूट तक राम सर्किट बनाया जा रहा है. काशी के विकास की सीएम योगी खुद निगरानी कर रहे हैं.

सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों पर एक्शन

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ सीएम योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अख्तियार कर रखा है. सीएम योगी ने विधानसभा में कहा जो भी लोग प्रदर्शन में मरे हैं, वह निर्दोष नहीं हैं. दंगाई खुद अपनी ही गोली से मरे हैं.विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़ का हर्जाना योगी सरकार प्रदर्शनकारियों से वसूल रही है. इसके अलावा प्रदर्शनकारियों के फोटो की होर्डिंग्स लगाई है और उन्हें वूसली के लिए नोटिस भी दी जा रही है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि जो कोई भी कानून का मजाक उड़ाएगा, वह अंजाम भुगतेगा. योगी के इस कदम को विपक्ष हिंदुत्व का एजेंडा बता रही है. विपक्ष द्वारा कहा गया कि यूपी पुलिस ने सख्ती की हदें पार कर दीं. लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार अपने भगवा एजेंडे पर बढ़ती जा रही है.

गंगा नदी के गांवों में गंगा चबूतरा

गंगा यात्रा के बहाने ही योगी सरकार अपने हिंदुत्व एजेंडे को और धार देने का काम किया है. सीएम योगी ने गंगा नदी के किनारे जगह-जगह आरती शुरू कराने का प्लान बनाया है. राज्य सरकार गंगा किनारे वाले गांवों में गंगा चबूतरा बनवा रही है, फिर वहां हर दिन शाम में आरती कराई जाएगी. इसके अलावा नदी किनारे फलदार पौधे लगाये जाएंगे. जैसे मध्य प्रदेश में नर्मदा किनारे पौधे लगाए गए थे. गंगा से हिंदू समुदाय का गहरा धार्मिक रिश्ता है. गंगा आरती और पूजन के जरिए योगी सरकार हिंदुत्व के एजेंडे को बनाए रखना चाहती है.

योगी राज में आजम खान परिवार जेल में

सूबे की सत्ता पर काबिज होने के बाद से योगी आदित्यनाथ की समाजवादी पार्टी के मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले आजम खान पर टेढ़ी नजर है. पिछले तीन साल में आजम खान पर 50 से ज्यादा मुकदमे में दर्ज किए गए हैं और मौजूदा समय में आजम खान उनकी पत्नी तंजीन फातिम और बेटे अब्दुल्ला आजम खान जेल में बंद है. आजम के बेटे अब्दुल्ला की विधायक की सदस्यता भी खत्म हो गई है. आजम खान की संपत्ति कुर्क करने के लिए रामपुर में मुनादी कराई गई. इसके अलावा आजम खान के विश्विविद्यालय पर भी योगी सरकार की नजर टेढ़ी रही है, उसकी बाउंड्री तोड़े जाने से लेकर जमीन तक की लीज को भी खत्म किया गया है. इसे बदले की कार्रवाई के तहत देखा जा रहा है.पूर्व सीएम अखिलेश यादव इस मुद्दे को लेकर योगी सरकार पर हमलावर रहे हैं.

कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश

योगी सरकार सूबे भर में कांवड़ियों पर एक तरफ मेहरबान नजर आई तो दूसरी तरफ सावन के महीने में कांवड़ियों के रूट पर मांस की बिक्री पर रोक लगाने का काम किया. कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाने का काम योगी सरकार के राज में हुआ है. कांवाड़ियों की सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरे से लेकर एंटी टेररिस्ट स्क्कॉड से निगरानी करने का काम योगी सरकार ने कराया. इसके अलावा स्लॉटर हाउस पर योगी सरकार ने ताला लगा दिया था. इतना ही नहीं योगी सरकार ने गौ-हत्या पर कड़ा रुख अख्तियार कर रखा है.

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