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योगी ने जातीय समीकरण साध किया मंत्रिमंडल में विस्तार

नई दिल्ली. केंद्र की मोदी सरकार की तर्ज पर यूपी की योगी सरकार ने जातीय समीकरण साधते हुए मंत्रिमंडल में विस्तार किया है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रिमंडल में 7 नए चेहरों को जगह दी है, जिनमें 1 ब्राह्मण, 3 ओबीसी, 2 एससी और 1 एसटी चेहरे हैं.7 नए चेहरों में हाल में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए ब्राह्मण चेहरे जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है. ब्राह्मणों की नाराजगी झेल रही भाजपा जितिन प्रसाद के माध्यम से उनकी नाराजगी दूर करना चाहती है. जितिन शाहजहांपुर के क्षेत्र में खासा प्रभाव रखते हैं.दिनेश खटीक, मेरठ की हस्तिनापुर से विधायक हैं. एससी समुदाय से आते हैं. खटीक समाज की अगर बात करें तो यूपी में पश्चिम से लेकर मध्य और पूरब तक कई विधानसभाएं ऐसी हैं जहां इनका वोट है. छत्रपाल गंगवार कुर्मी समाज से आते हैं. बरेली से विधायक हैं. कुछ दिन पहले केंद्र से संतोष गंगवार की छुट्टी हुई थी, तो अब छत्रपाल गंगवार को जगह देकर कुर्मी वोटों को साधने की कोशिश की गई है.

धर्मवीर प्रजापति आगरा से आते हैं. प्रजापति समुदाय का वैसे तो वोट के हिसाब से बहुत बड़ा राजनीतिक रसूख नहीं है, लेकिन बीजेपी ने इन्हीं छोटे-छोटे वर्गों को साधकर फिर से सत्ता में बने रहने की कोशिश की है. संजीव कुमार गोंड जनजाति समाज से आते हैं. सोनभद्र क्षेत्र से इनके जरिए जनजातीय समाज को अपने साथ जोड़े रखने की कवायद है. जनजातीय वर्ग का पूर्वी यूपी में अच्छा खासा वोट बैंक है.पलटूराम एससी वर्ग से आते हैं. जाटब समुदाय की अगर बात करें तो पश्चिम और मध्य उत्तर प्रदेश में खासा असर है. मायावती भी जाटब समुदाय से आती हैं तो ऐसे में पलटूराम को जगह देकर जाटब समुदाय को साधने की कोशिश की गई है. संगीता बिंद निषाद समुदाय से हैं. पहले निषाद पार्टी के साथ गठबंधन और अब संगीता बिंद को मंत्री बनाकर निषादों को साधने की कवायद की गई. तकरीबन प्रदेश की 100 के आसपास सीटें ऐसी हैं, जहां निषादों के वोट हैं.कुछ दिन पूर्व केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में यूपी से 7 चेहरों को जगह दी गई थी, उसमें छोटे-छोटे वर्गों को जगह दी गई. और अब उसी आधार पर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ ने सोशल इंजीनियरिंग करते हुए छोटे-छोटे ऐसे वर्गों के लोगों को मंत्रिमंडल विस्तार में जगह दी है, जिनका राजनीतिक रसूख तो बहुत बड़ा नहीं, लेकिन वे कई विधानसभाओं को प्रभावित करते हैं.

कांग्रेस से भाजपा में आये जितिन प्रसाद बने कैबिनेट मिनिस्टर

कांग्रेस से छोड़कर भाजपा में शामिल हुये जितिन प्रसाद  योगी मंत्रिमंडल में शामिल हो गये हैं. कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है. योगी मंत्रिमंडल विस्तार  (Yogi Cabinet Expansion) में 7 नये मंत्री शपथ ले रहे हैं, जिसमें केवल जितिन प्रसाद को ही कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, इसे देखते हुए योगी मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा रहा है, जिसके जरिये यूपी में जातीय सियासत को साधने की कोशिश बीजेपी करेगी.जितिन प्रसाद मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्र में मंत्री रह चुके हैं. कांग्रेस में लंबी पारी खेलने वाले जितिन प्रसाद ने कुछ महीनों पहले बीजेपी ज्वाइन कर ली थी. जितिन प्रसाद के भाजपा ज्वाइन करने और अब उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने को बीजेपी की आगामी चुनावों में ब्राह्मण को जोड़ने की राजनीति के रूप में देखा जा रहा है. बता दें कि जितिन प्रसाद ने कुछ महीने पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और बीजेपी चीफ जेपी नड्डा की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुये थे.

जितिन प्रसाद को विरासत में मिली है राजनीति

वैसे शाहजहांपुर के जितिन प्रसाद को राजनीति विरासत में मिली है. पिता राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के राजनीतिक सलाहकार थे, खुद HRD राज्यमंत्री रहे. कांग्रेस पार्टी के चर्चित चेहरे रहे जितिन प्रसाद अब बीजेपी शामिल हो चुके हैं. अब प्रसाद को यूपी के आगामी चुनावों में ब्राह्मण चेहरा के रूप में पेश करने की संभावनाएं हैं. जितिन प्रसाद के परिवार की तीन पीढ़ियां कांग्रेस पार्टी से सक्रिय राजनीति में रही हैं. जितिन प्रसाद को यूपी में कांग्रेस के चर्चित युवा चेहरों में से एक कहा जाता था. वो राहुल गांधी के करीबी नेताओं में से एक रहे और प्रदेश में ब्राह्मण वोटों की गोलबंदी में कांग्रेस उन्हें एक बड़े चेहरे के रूप में इस्तेमाल करना चाहती थी.

योगी का बड़ा दांव, सामाजिक समीकरण साध जीतेंगे 2022

यूपी में अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इसके करीब चार महीने पहले योगी आदित्यनाथ की सरकार ने आज मंत्रिमंडल विस्तार किया है. इस विस्तार में यह ख्याल रखा गया है कि सभी नए मंत्रियों के सरकार में आने का, सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी को फायदा मिले. विधानसभा चुनाव की अनौपचारिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, इसके मद्देनजर मंत्रिमंडल में विभिन्न जाति व समुदाय के नेताओं को जगह देकर इस वर्ग के मतदाताओं का हित साधने की कोशिश की गई है. जितिन प्रसाद समेत पलटू राम, संजीव कुमार, संगीता बिंद, दिनेश खटिक, धर्मवीर प्रजापति और छत्रपाल गंगवार जैसे नाम, बीजेपी की इसी मंशा को पूरा करेंगे, ऐसी उम्मीद पार्टी कर रही होगी.

ऐन विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट विस्तार किया है, उसे सियासी हलके में बड़े दांव के रूप में देखा जा रहा है. समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और तमाम अन्य छोटी-बड़ी पार्टियों की रस्साकशी को देखते हुए सीएम योगी ने बड़े सधे अंदाज में यह दांव चला है. सियासी जानकार उनके इस दांव पर गहरी नजर बनाए रखेंगे. यह देखेंगे कि ये नए चेहरे विधानसभा चुनाव में बीजेपी को किस हद तक लाभ की स्थिति में रख पाते हैं.

आपको बता दें कि पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश में योगी कैबिनेट के विस्तार की चर्चाएं चल रही थीं. इनमें तमाम नामों और नए चेहरों के आने के कयास लगाए जा रहे थे. इनमें से कई चेहरों ने तो आज शाम राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली, लेकिन इक्का-दुक्का नाम जरूर नजर नहीं आए. इनमें से एक बेबी रानी मौर्य का है. हाल ही में उत्तराखंड के राज्यपाल का पद छोड़कर आईं बेबी रानी मौर्य के भी योगी कैबिनेट में स्थान बनाने की हलचल आज पूरे दिन चलती रही, लेकिन अंतिम क्षणों में वह कहीं नहीं दिखीं. आगरा के मेयर के रूप में चर्चित मौर्य को पार्टी ने कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है.

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